शंभु स्तोत्र

कैवल्यमूर्तिं योगासनस्थं
कारुण्यपूर्णं कार्तस्वराभम्|
बिल्वादिपत्रैरभ्यर्चिताङ्गं
देवं भजेऽहं बालेन्दुमौलिम्|
गन्धर्वयक्षैः सिद्धैरुदारै-
र्देवैर्मनुष्यैः संपूज्यरूपम्|
सर्वेन्द्रियेशं सर्वार्तिनाशं
देवं भजेऽहं योगेशमार्यम्|
भस्मार्च्यलिङ्गं कण्ठेभुजङ्गं
नृत्यादितुष्टं निर्मोहरूपम्|
भक्तैरनल्पैः संसेविगात्रं
देवं भजेऽहं नित्यं शिवाख्यम्|
भर्गं गिरीशं भूतेशमुग्रं
नन्दीशमाद्यं पञ्चाननं च|
त्र्यक्षं कृपालुं शर्वं जटालं
देवं भजेऽहं शम्भुं महेशम्|

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

71.5K
1.0K

Comments Hindi

i84uc
वेदधारा ने मेरे जीवन में बहुत सकारात्मकता और शांति लाई है। सच में आभारी हूँ! 🙏🏻 -Pratik Shinde

आपकी वेबसाइट बहुत ही अनोखी और ज्ञानवर्धक है। 🌈 -श्वेता वर्मा

वेदधारा की धर्मार्थ गतिविधियों का हिस्सा बनकर खुश हूं 😇😇😇 -प्रगति जैन

वेदधारा के कार्य से हमारी संस्कृति सुरक्षित है -मृणाल सेठ

आपकी वेबसाइट बहुत ही विशिष्ट और ज्ञानवर्धक है। 🌞 -आरव मिश्रा

Read more comments

Other stotras

Copyright © 2024 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |