दुखतारण शिव स्तोत्र

त्वं स्रष्टाप्यविता भुवो निगदितः संहारकर्तचाप्यसि
त्वं सर्वाश्रयभूत एव सकलश्चात्मा त्वमेकः परः।
सिद्धात्मन् निधिमन् महारथ सुधामौले जगत्सारथे
शम्भो पालय मां भवालयपते संसारदुःखार्णवात्।
भूमौ प्राप्य पुनःपुनर्जनिमथ प्राग्गर्भदुःखातुरं
पापाद्रोगमपि प्रसह्य सहसा कष्टेन संपीडितम्।
सर्वात्मन् भगवन् दयाकर विभो स्थाणो महेश प्रभो
शम्भो पालय मां भवालयपते संसारदुःखार्णवात्।
ज्ञात्वा सर्वमशाश्वतं भुवि फलं तात्कालिकं पुण्यजं
त्वां स्तौमीश विभो गुरो नु सततं त्वं ध्यानगम्यश्चिरम्।
दिव्यात्मन् द्युतिमन् मनःसमगते कालक्रियाधीश्वर
शम्भो पालय मां भवालयपते संसारदुःखार्णवात्।
ते कीर्तेः श्रवणं करोमि वचनं भक्त्या स्वरूपस्य ते
नित्यं चिन्तनमर्चनं तव पदाम्भोजस्य दास्यञ्च ते।
लोकात्मन् विजयिन् जनाश्रय वशिन् गौरीपते मे गुरो
शम्भो पालय मां भवालयपते संसारदुःखार्णवात्।
संसारार्णव- शोकपूर्णजलधौ नौका भवेस्त्वं हि मे
भाग्यं देहि जयं विधेहि सकलं भक्तस्य ते सन्ततम्।
भूतात्मन् कृतिमन् मुनीश्वर विधे श्रीमन् दयाश्रीकर
शम्भो पालय मां भवालयपते संसारदुःखार्णवात्।
नाचारो मयि विद्यते न भगवन् श्रद्धा न शीलं तपो
नैवास्ते मयि भक्तिरप्यविदिता नो वा गुणो न प्रियम्।
मन्त्रात्मन् नियमिन् सदा पशुपते भूमन् ध्रुवं शङ्कर
शम्भो पालय मां भवालयपते संसारदुःखार्णवात्।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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