शिव षट्क स्तोत्र

अमृतबलाहक- मेकलोकपूज्यं
वृषभगतं परमं प्रभुं प्रमाणम्।
गगनचरं नियतं कपालमालं
शिवमथ भूतदयाकरं भजेऽहम्।
गिरिशयमादिभवं महाबलं च
मृगकरमन्तकरं च विश्वरूपम्।
सुरनुतघोरतरं महायशोदं
शिवमथ भूतदयाकरं भजेऽहम्।
अजितसुरासुरपं सहस्रहस्तं
हुतभुजरूपचरं च भूतचारम्।
महितमहीभरणं बहुस्वरूपं
शिवमथ भूतदयाकरं भजेऽहम्।
विभुमपरं विदितदं च कालकालं
मदगजकोपहरं च नीलकण्ठम्।
प्रियदिविजं प्रथितं प्रशस्तमूर्तिं
शिवमथ भूतदयाकरं भजेऽहम्।
सवितृसमामित- कोटिकाशतुल्यं
ललितगुणैः सुयुतं मनुष्बीजम्।
श्रितसदयं कपिलं युवानमुग्रं
शिवमथ भूतदयाकरं भजेऽहम्।
वरसुगुणं वरदं सपत्ननाशं
प्रणतजनेच्छितदं महाप्रसादम्।
अनुसृतसज्जन- सन्महानुकम्पं
शिवमथ भूतदयाकरं भजेऽहम्।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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