गणनायक अष्टक स्तोत्र

 

एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम्।
लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम्।
मौञ्जीकृष्णाजिनधरं नागयज्ञोपवीतिनम्।
बालेन्दुसुकलामौलिं वन्देऽहं गणनायकम्।
अम्बिकाहृदयानन्दं मातृभिः परिवेष्टितम्।
भक्तिप्रियं मदोन्मत्तं वन्देऽहं गणनायकम्।
चित्ररत्नविचित्राङ्गं चित्रमालाविभूषितम्।
चित्ररूपधरं देवं वन्देऽहं गणनायकम्।
गजवक्त्रं सुरश्रेष्ठं कर्णचामरभूषितम्।
पाशाङ्कुशधरं देवं वन्देऽहं गणनायकम्।
मूषकोत्तममारुह्य देवासुरमहाहवे।
योद्धुकामं महावीर्यं वन्देऽहं गणनायकम्।
यक्षकिन्नरगन्धर्वसिद्धविद्याधरैः सदा।
स्तूयमानं महात्मानं वन्देऽहं गणनायकम्।
सर्वविघ्नहरं देवं सर्वविघ्नविवर्जितम्।
सर्वसिद्धिप्रदातारं वन्देऽहं गणनायकम्।
गणाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् सततं नरः।
सिद्ध्यन्ति सर्वकार्याणि विद्यावान् धनवान् भवेत्।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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Comments Hindi

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Bahot acha Gaya hai -Mayur Vaidya

वेद पाठशालाओं और गौशालाओं के लिए आप जो कार्य कर रहे हैं उसे देखकर प्रसन्नता हुई। यह सभी के लिए प्रेरणा है....🙏🙏🙏🙏 -वर्षिणी

वेदधारा ने मेरी सोच बदल दी है। 🙏 -दीपज्योति नागपाल

वेदधारा के धर्मार्थ कार्यों में समर्थन देने पर बहुत गर्व है 🙏🙏🙏 -रघुवीर यादव

Om namo Bhagwate Vasudevay Om -Alka Singh

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