गणपति मंगल अष्टक स्तोत्र

गजाननाय गाङ्गेयसहजाय सदात्मने।
गौरीप्रियतनूजाय गणेशायास्तु मङ्गलम्।
नागयज्ञोपवीताय नतविघ्नविनाशिने।
नन्द्यादिगणनाथाय नायकायास्तु मङ्गलम्।
इभवक्त्राय चेन्द्रादिवन्दिताय चिदात्मने।
ईशानप्रेमपात्राय नायकायास्तु मङ्गलम्।
सुमुखाय सुशुण्डाग्रोक्षिप्तामृतघटाय च।
सुरवृन्दनिषेव्याय चेष्टदायास्तु मङ्गलम्।
चतुर्भुजाय चन्द्रार्धविलसन्मस्तकाय च।
चरणावनतानर्थतारणायास्तु मङ्गलम्।
वक्रतुण्डाय वटवे वन्याय वरदाय च।
विरूपाक्षसुतायास्तु विघ्ननाशाय मङ्गलम्।
प्रमोदमोदरूपाय सिद्धिविज्ञानरूपिणे।
प्रकृष्टपापनाशाय फलदायास्तु मङ्गलम्।
मङ्गलं गणनाथाय मङ्गलं हरसूनवे।
मङ्गलं विघ्नराजाय विघहर्त्रेस्तु मङ्गलम्।
श्लोकाष्टकमिदं पुण्यं मङ्गलप्रदमादरात्।
पठितव्यं प्रयत्नेन सर्वविघ्ननिवृत्तये।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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