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सिद्धि विनायक स्तोत्र

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हिंदू धर्म के पुनरुद्धार और वैदिक गुरुकुलों के समर्थन के लिए आपका कार्य सराहनीय है - राजेश गोयल

वेदधारा के माध्यम से मिले सकारात्मकता और विकास के लिए आभारी हूँ। -Varsha Choudhry

वेदधारा की वजह से मेरे जीवन में भारी परिवर्तन और सकारात्मकता आई है। दिल से धन्यवाद! 🙏🏻 -Tanay Bhattacharya

आप जो अच्छा काम कर रहे हैं, उसे देखकर बहुत खुशी हुई 🙏🙏 -उत्सव दास

वेदधारा की धर्मार्थ गतिविधियों का हिस्सा बनकर खुश हूं 😇😇😇 -प्रगति जैन

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विघ्नेश विघ्नचयखण्डननामधेय
श्रीशङ्करात्मज सुराधिपवन्द्यपाद।
दुर्गामहाव्रतफलाखिलमङ्गलात्मन्
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
सत्पद्मरागमणिवर्णशरीरकान्तिः
श्रीसिद्धिबुद्धिपरिचर्चितकुङ्कुमश्रीः।
दक्षस्तने वलियितातिमनोज्ञशुण्डो
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
पाशाङ्कुशाब्जपरशूंश्च दधच्चतुर्भि-
र्दोर्भिश्च शोणकुसुमस्रगुमाङ्गजातः।
सिन्दूरशोभितललाटविधुप्रकाशो
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
कार्येषु विघ्नचयभीतविरिञ्चिमुख्यैः
संपूजितः सुरवरैरपि मोहकाद्यैः।
सर्वेषु च प्रथममेव सुरेषु पूज्यो
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
शीघ्राञ्चनस्खलनतुङ्गरवोर्ध्वकण्ठ-
स्थूलेन्दुरुद्रगणहासितदेवसङ्घः।
शूर्पश्रुतिश्च पृथुवर्त्तुलतुङ्गतुन्दो
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
यज्ञोपवीतपदलम्भितनागराजो
मासादिपुण्यददृशीकृत-ऋक्षराजः।
भक्ताभयप्रद दयालय विघ्नराज
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
सद्रत्नसारततिराजितसत्किरीटः
कौसुम्भचारुवसनद्वय ऊर्जितश्रीः।
सर्वत्र मङ्गलकरस्मरणप्रतापो
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।
देवान्तकाद्यसुरभीतसुरार्तिहर्ता
विज्ञानबोधनवरेण तमोऽपहर्ता।
आनन्दितत्रिभुवनेश कुमारबन्धो
विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्।

 

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