गणेश पंचाक्षर स्तोत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम्।
अनेकदं तं भक्तानामेकदन्तमुपास्महे।
गौरीसुपुत्राय गजाननाय
गीर्वाणमुख्याय गिरीशजाय।
ग्रहर्क्षपूज्याय गुणेश्वराय
नमो गकाराय गणेश्वराय।
नादस्वरूपाय निरङ्कुशाय
नन्द्यप्रशस्ताय नृतिप्रियाय।
नमत्सुरेशाय निरग्रजाय
नमो णकाराय गणेश्वराय।
वाणीविलासाय विनायकाय
वेदान्तवेद्याय परात्पराय।
समस्तविद्याऽऽशुवरप्रदाय
नमो वकाराय गणेश्वराय।
रवीन्दुभौमादिभिरर्चिताय
रक्ताम्बरायेष्टवरप्रदाय।
ऋद्धिप्रियायेन्द्रजयप्रदाय
नमोऽस्तु रेफाय गणेश्वराय।
यक्षाधिनाथाय यमान्तकाय
यशस्विने चामितकीर्तिताय।
योगेश्वरायार्बुदसूर्यभाय
नमो गकाराय गणेश्वराय।
गणेशपञ्चाक्षरसंस्तवं यः
पठेत् प्रियो विघ्नविनायकस्य।
भवेत् स धीरो मतिमान् महांश्च
नरः सदा भक्तगणेन युक्तः।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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