प्रतिभटश्रेणिभीषण वरगुणस्तोमभूषण।
जनिभयस्थानतारण जगदवस्थानकारण।
निखिलदुष्कर्मकर्षण निगमसद्धर्मदर्शन।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
यह श्लोक एक गहरा दर्शन प्रस्तुत करता है। भगवान विष्णु का यह अस्त्र बहुत पवित्र है। यह क्रूर शत्रुओं को डराता है। इसमें कई महान गुण मौजूद हैं। यह हमें सांसारिक भयों से बचाता है। हमारा जीवन संघर्षों से भरा है। सुदर्शन चक्र इन बाधाओं को पार कराता है। यह पूरे ब्रह्मांड को संभालता है। यह हमारे बुरे कर्मों को काटता है। पुराने कर्म हमें बुरी तरह बांधते हैं। यह चक्र इन भारी जंजीरों को तोड़ता है। यह हमें सही रास्ता दिखाता है। यह वेदों का सच्चा धर्म सिखाता है। भगवान सुदर्शन की जय हो। सुदर्शन एक जीवित ईश्वरीय शक्ति है। यह मन की गहरी रुकावटों को दूर करता है। यह अज्ञानता के अंधेरे को मिटाता है। डर हमेशा अज्ञानता से पैदा होता है। सच्चा बचाव केवल ईश्वर की कृपा में है। पूर्ण समर्पण से ही सच्ची शांति मिलती है।
शुभजगद्रूपमण्डन सुरगणत्रासखण्डन।
शतमखब्रह्मवन्दित शतपथब्रह्मनन्दित।
प्रथितविद्वत्सपक्षित भजदहिर्बुध्न्यलक्षित।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
यहाँ सुदर्शन चक्र के सुंदर रूप पर ध्यान दें। यह पवित्र चक्र ब्रह्मांड को सजाता है। यह देवताओं के सभी डर दूर करता है। अच्छे लोगों पर कई खतरे आते हैं। सुदर्शन इन सभी अंधेरे खतरों को नष्ट करता है। भगवान ब्रह्मा और इंद्र इसकी पूजा करते हैं। पवित्र ग्रंथ इसकी महिमा गाते हैं। शतपथ ब्राह्मण में इसकी बहुत प्रशंसा है। बड़े-बड़े विद्वान इसकी शरण में आते हैं। भगवान शिव भी इसका ध्यान करते हैं। भगवान सुदर्शन की जय हो। सच्ची शक्ति में गहरी सुंदरता होती है। ताकत का मतलब अंधी क्रूरता नहीं है। सुदर्शन पूरी ब्रह्मांडीय व्यवस्था की रक्षा करता है। महान देवता इसी शक्ति पर निर्भर हैं। सर्वोच्च देव भी इसके आगे झुकते हैं। पूर्ण ज्ञान और शुद्ध शक्ति यहाँ एक साथ मिलते हैं। बुद्धिमान लोग इस गहरी सच्चाई को पहचानते हैं। शुद्ध शक्ति जीवन की पूरी तरह रक्षा करती है।
स्फुटतटिज्जालपिञ्जर पृथुतरज्वालपञ्जर।
परिगतप्रत्नविग्रह परिमितप्रज्ञदुर्ग्रह।
प्रहरणग्राममण्डित परिजनत्राणपण्डित।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
यह पंक्ति चक्र के उग्र रूप का वर्णन करती है। यह अस्त्र तेज बिजली की तरह चमकता है। यह एक विशाल आग का पिंजरा बनाता है। इसका रूप बहुत प्राचीन और शाश्वत है। कम समझ वाले लोग इसे नहीं जान पाते हैं। छोटी सोच ईश्वरीय सत्य को नहीं समझ सकती। यह अपने भीतर कई छोटे हथियार रखता है। यह भक्तों की रक्षा करने में सबसे तेज है। भगवान सुदर्शन की जय हो। भगवान का रूप शुद्ध प्रकाश है। अज्ञानी मन इस सत्य को नहीं देख सकता। ईश्वर सुरक्षा के लिए कई साधन अपनाते हैं। यह पवित्र आग सभी पापों को जला देती है। यह आसपास की पूरी जगह को शुद्ध करती है। यह आग अंदर के अच्छे लोगों को बचाती है। यह केवल बाहर के बुरे लोगों को जलाती है। यह एक रक्षक की तरह काम करती है। ईश्वरीय प्रकाश सबसे बड़ी ढाल बनता है।
निजपदप्रीतसद्गण निरुपधिस्फीतषड्गुण।
निगमनिर्व्यूढवैभव निजपरव्यूहवैभव।
हरिहयद्वेषिदारण हरपुरप्लोषकारण।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
इस चरण में ईश्वरीय गुणों पर सीधा ध्यान केंद्रित किया गया है। अच्छे लोग भगवान के पवित्र चरणों से प्यार करते हैं। सुदर्शन में छह अनंत महान गुण हैं। ज्ञान और बल इसके दो मुख्य गुण हैं। शासन और शक्ति दो अन्य गुण हैं। ऊर्जा और तेज इन छह गुणों को पूरा करते हैं। वेद इसकी अपार शक्ति को सच मानते हैं। यह हर रूप में अपनी ताकत दिखाता है। यह सबसे ऊंचे आध्यात्मिक लोकों पर राज करता है। यह इस दुनिया में भी काम करता है। यह देवताओं के दुश्मनों को मारता है। इसी ने काशी शहर को जलाया था। भगवान सुदर्शन की जय हो। भगवान इसी विशेष शक्ति के माध्यम से काम करते हैं। सुदर्शन में सभी सर्वोच्च गुण पूरी तरह मौजूद हैं। यह घमंडी लोगों का अहंकार तोड़ता है। यह ब्रह्मांड में संतुलन वापस लाता है। ईश्वरीय गुण हमेशा हमारा सही मार्गदर्शन करते हैं।
दनुजविस्तारकर्तन जनितमिस्राविकर्तन।
दनुजविद्यानिकर्तन भजदविद्यानिवर्तन।
अमरदृष्टस्वविक्रम समरजुष्टभ्रमिक्रम।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
यहाँ मुख्य रूप से क्या बताया जा रहा है? यह चक्र राक्षसों की सेनाओं को काटता है। यह एक चमकते हुए सूरज की तरह काम करता है। यह राक्षसों के काले जादू को नष्ट करता है। यह भक्तों के अज्ञान को पूरी तरह मिटाता है। सभी देवता इसकी महान वीरता को देखते हैं। यह युद्ध के मैदान में बहुत तेजी से घूमता है। भगवान सुदर्शन की जय हो। राक्षस हमारी अंदर की बुरी आदतों को दर्शाते हैं। काला जादू दुनिया के झूठे भ्रम को दिखाता है। यह घूमता हुआ चक्र इन भ्रमों को तोड़ता है। प्रकाश हमेशा गहरे अंधेरे को हरा देता है। सूरज रात की उदासी को दूर करता है। सुदर्शन मन की उदासी को खत्म करता है। सच्चा ज्ञान झूठे विश्वासों को काट देता है। चक्र का घूमना भगवान की निरंतर कृपा को दिखाता है। सच्चाई हमेशा भारी झूठे भ्रमों को चकनाचूर कर देती है।
प्रतिमुखालीढबन्धुर पृथुमहाहेतिदन्तुर।
विकटमायाबहिष्कृत विविधमालापरिष्कृत।
स्थिरमहायन्त्रतन्त्रित दृढदयातन्त्रयन्त्रित।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
पहले विचारों को स्थापित करने के बाद अब दिशा बदलती है। यह श्लोक एक सुंदर योद्धा मुद्रा का वर्णन करता है। इस चक्र के किनारे बहुत तेज और नुकीले हैं। यह कई बड़े हथियारों से घिरा हुआ है। यह भयानक झूठे मायाजाल को आसानी से तोड़ता है। यह कई सुंदर फूलों की मालाएं पहनता है। यह पवित्र यंत्रों द्वारा पूरी तरह बंधा हुआ है। यह गहरी करुणा द्वारा नियंत्रित होता है। भगवान सुदर्शन की जय हो। इस उग्र रूप के भीतर एक कोमल दिल है। यह बुराई को रोकने के लिए हथियार उठाता है। यह कृपा दिखाने के लिए फूल पहनता है। दया के बिना शक्ति केवल एक हिंसा है। ईश्वरीय शक्ति हमेशा बहुत दयालु होती है। भगवान का हर कठोर काम करुणा से भरा होता है। ईश्वर केवल सच्चे प्यार को बचाने के लिए लड़ते हैं। प्रेम ही सबसे बड़ी रक्षक शक्ति को दिशा देता है।
महितसम्पत्सदक्षर विहितसम्पत्षडक्षर।
षडरचक्रप्रतिष्ठित सकलतत्त्वप्रतिष्ठित।
विविधसङ्कल्पकल्पक विबुधसङ्कल्पकल्पक।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
ज्ञान का यह हिस्सा कुछ रहस्यमयी बातों को उजागर करता है। यह एक गौरवशाली पवित्र अक्षर पर जोर देता है। छह अक्षरों वाला मंत्र बड़ी संपत्ति लाता है। यह छह तीलियों वाले एक पहिए में रहता है। यह ब्रह्मांड के सभी मूल तत्वों को धारण करता है। यह हमारी कई अच्छी इच्छाओं को पूरा करता है। यह देवताओं की इच्छाओं को भी पूरा करता है। भगवान सुदर्शन की जय हो। मंत्रों के अंदर असली ईश्वरीय ऊर्जा होती है। ध्वनि ही शक्ति का सबसे बड़ा स्रोत है। छह तीलियां ब्रह्मांडीय ज्यामिति को दर्शाती हैं। सब कुछ इसी पवित्र चक्र के अंदर टिका है। भगवान के पास जाकर सभी इच्छाएं शुद्ध हो जाती हैं। ईश्वर भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह का धन देते हैं। सबसे बड़ा धन मन की गहरी शांति है। पवित्र ध्वनियां गहरी छिपी हुई कृपा को खोलती हैं।
भुवननेत्रत्रयीमय सवनतेजस्त्रयीमय।
निरवधिस्वादुचिन्मय निखिलशक्ते जगन्मय।
अमितविश्वक्रियामय शमितविश्वग्भयामय।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
यहाँ चक्र की पूर्णता को बहुत स्पष्ट रूप से दिखाया गया है। यह दुनिया की आंख के रूप में काम करता है। यह तीनों पवित्र वेदों का रूप है। यह यज्ञ की अत्यंत पवित्र अग्नि है। यह अंतहीन और मीठी शुद्ध चेतना है। यह निर्माण की सभी शक्तियों को रखता है। यह हर जगह लगातार अपना काम करता है। यह सभी डरों और बीमारियों को नष्ट करता है। भगवान सुदर्शन की जय हो। यह चक्र स्वयं ही पूरा ब्रह्मांड है। यह ज्ञान का सबसे सच्चा स्रोत है। सभी कार्य और ऊर्जा इसी से आते हैं। यह कोई छोटा सा साधारण हथियार नहीं है। यह स्वयं सर्वोच्च भगवान का रूप है। डर और बीमारी ईश्वर से दूर होने पर आते हैं। इस एकता को समझने से सारा दर्द खत्म हो जाता है। अंतिम सत्य एक असीम और मीठा आनंद है।
द्विचतुष्कमिदं प्रभूतसारं
पठतां वेङ्कटनायकप्रणीतम्।
विषमेऽपि मनोरथः प्रधावन्
न विहन्येत रथाङ्गधुर्यगुप्तः।
अंत में यह श्लोक प्रार्थना का सीधा फल बताता है। श्री वेदांत देशिक ने इन श्लोकों को लिखा था। इसमें आठ बहुत ही शक्तिशाली छंद शामिल हैं। इसमें बहुत गहरा आध्यात्मिक सार छिपा हुआ है। एक भक्त को इसका नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। बाधाओं के बावजूद सारी इच्छाएं पूरी होंगी। चक्र के भगवान भक्त की पूरी रक्षा करते हैं। यह भगवान का अंतिम और सच्चा वादा है। यह प्रार्थना के फल को स्पष्ट दिखाता है। ईश्वरीय कृपा दुनिया की सबसे कठिन रुकावटों को हटा देती है। भगवान पर पूरा भरोसा रास्ते को आसान बनाता है। जीवन कई भयानक और अचानक चुनौतियां देता है। भगवान जीवन के रथ को सुरक्षित चलाते हैं। कृपा से असंभव सपने भी सफल हो जाते हैं। शुद्ध और सच्चे दिलों के लिए सुरक्षा निश्चित है। सच्ची प्रार्थना हमेशा एक पक्की जीत लाती है।
प्रतिभटश्रेणिभीषण वरगुणस्तोमभूषण।
जनिभयस्थानतारण जगदवस्थानकारण।
निखिलदुष्कर्मकर्षण निगमसद्धर्मदर्शन।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
शुभजगद्रूपमण्डन सुरगणत्रासखण्डन।
शतमखब्रह्मवन्दित शतपथब्रह्मनन्दित।
प्रथितविद्वत्सपक्षित भजदहिर्बुध्न्यलक्षित।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
स्फुटतटिज्जालपिञ्जर पृथुतरज्वालपञ्जर।
परिगतप्रत्नविग्रह परिमितप्रज्ञदुर्ग्रह।
प्रहरणग्राममण्डित परिजनत्राणपण्डित।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
निजपदप्रीतसद्गण निरुपधिस्फीतषड्गुण।
निगमनिर्व्यूढवैभव निजपरव्यूहवैभव।
हरिहयद्वेषिदारण हरपुरप्लोषकारण।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
दनुजविस्तारकर्तन जनितमिस्राविकर्तन।
दनुजविद्यानिकर्तन भजदविद्यानिवर्तन।
अमरदृष्टस्वविक्रम समरजुष्टभ्रमिक्रम।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
प्रतिमुखालीढबन्धुर पृथुमहाहेतिदन्तुर।
विकटमायाबहिष्कृत विविधमालापरिष्कृत।
स्थिरमहायन्त्रतन्त्रित दृढदयातन्त्रयन्त्रित।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
महितसम्पत्सदक्षर विहितसम्पत्षडक्षर।
षडरचक्रप्रतिष्ठित सकलतत्त्वप्रतिष्ठित।
विविधसङ्कल्पकल्पक विबुधसङ्कल्पकल्पक।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
भुवननेत्रत्रयीमय सवनतेजस्त्रयीमय।
निरवधिस्वादुचिन्मय निखिलशक्ते जगन्मय।
अमितविश्वक्रियामय शमितविश्वग्भयामय।
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन।
द्विचतुष्कमिदं प्रभूतसारं
पठतां वेङ्कटनायकप्रणीतम्।
विषमेऽपि मनोरथः प्रधावन्
न विहन्येत रथाङ्गधुर्यगुप्तः।