नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
जीवन का असली लक्ष्य उस आनंद को पाना है जो कभी खत्म नहीं होता। माँ अन्नपूर्णा हमेशा बना रहने वाला आनंद देती हैं। वे हमें वरदान और अभय दान देती हैं। वे सुंदरता के सागर के समान हैं। हमारे सारे भयानक पापों को वे ही धोकर पवित्र करती हैं। वे साक्षात भगवान शिव की शक्ति, माहेश्वरी हैं। उन्होंने हिमालय के वंश को पवित्र किया है। वे ही काशी नगर की महारानी हैं। हे माँ अन्नपूर्णेश्वरी! आप ही कृपा करके सहारा देने वाली हैं, मुझे ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा दीजिए। यह भिक्षा केवल अन्न की नहीं है। यह जीवन को सही दिशा में ले जाने वाले विवेक की भिक्षा है।
आपका सहारा ही सच्चा सहारा है, जो हर डर से मुक्त कर देता है।
नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी
मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी।
काश्मीरागरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
देवी का स्वरूप ध्यान करने के लिए बहुत सुंदर है। उन्होंने कई तरह के अनोखे रत्नों और आभूषणों को धारण किया है। वे सुनहरे वस्त्र पहनकर बहुत सुशोभित हो रही हैं। उनके गले में मोतियों का हार शोभायमान है। उनके शरीर से केसर और अगरु की दिव्य सुगंध आती है, जो मन को मोह लेती है। वे ही काशी नगरी की स्वामिनी हैं। हे कृपा का सहारा देने वाली माँ अन्नपूर्णेश्वरी! आप मुझे अपनी दया और ज्ञान की भिक्षा प्रदान करें। यह केवल बाहरी सुंदरता का वर्णन नहीं है। उनके आभूषण उनके दिव्य गुणों का प्रतीक हैं। उनकी सुगंध उनकी कृपा की तरह है जो बिना दिखे ही जीवन को सुंदर बना देती है।
माँ का दिव्य रूप हमारे मन को संसार से हटाकर ईश्वर की ओर ले जाता है।
योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मैकनिष्ठाकरी
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी।
सर्वैश्वर्यकरी तपःफलकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
जीवन में सच्चा सुख कैसे मिलता है? माँ अन्नपूर्णा हमें योग का आनंद देती हैं, यानी ईश्वर से जुड़ने का सुख। वे हमारे शत्रुओं का नाश करती हैं। वे हमें धर्म के रास्ते पर मज़बूती से चलना सिखाती हैं। उनका तेज सूर्य, चंद्रमा और अग्नि की रोशनी की तरह है। वे तीनों लोकों की रक्षा करती हैं। वे हर तरह का सुख और तपस्या का फल देने वाली हैं। वे ही काशी नगर की रानी हैं। हे कृपा का सहारा देने वाली माँ अन्नपूर्णेश्वरी! मुझे अपनी कृपा की भिक्षा दीजिए। यहाँ शत्रु का मतलब हमारे अंदर के क्रोध, लालच और अहंकार से है। माँ की कृपा से ही हम इन पर विजय पा सकते हैं।
जब हम धर्म के मार्ग पर चलते हैं, तो माँ की शक्ति हमारी रक्षा करती है।
कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी ह्युमा शाङ्करी
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ह्योङ्कारबीजाक्षरी।
मोक्षद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
माँ के कई रूप और नाम हैं, जो उनके अलग-अलग गुणों को दर्शाते हैं। वे कैलाश पर्वत की गुफाओं में निवास करती हैं। वे ही गौरी, उमा और शंकर की प्रिय शक्ति शांकरी हैं। वे कुमारी रूप में भी हैं। वेदों का सच्चा अर्थ उनकी कृपा से ही समझ आता है। ॐकार ही उनका बीज रूप है, जिससे पूरी सृष्टि बनी है। वे ही मोक्ष के बंद दरवाज़े को भक्तों के लिए खोल देती हैं। वे काशी नगर की महारानी हैं। हे कृपा का सहारा देने वाली माँ अन्नपूर्णेश्वरी! मुझे मोक्ष की भिक्षा दीजिए। मोक्ष का दरवाज़ा हमारे ही कर्मों और अज्ञान से बंद होता है। माँ की कृपा उस ताले को खोलने वाली चाबी है।
ज्ञान का सच्चा अर्थ शब्दों को जानना नहीं, बल्कि माँ की कृपा से उसे अनुभव करना है।
दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी
लीलानाटकसूत्रखेलनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी।
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
यह पूरी दुनिया ईश्वर का एक खेल है। जो कुछ हमें दिखता है और जो नहीं दिखता, वह सब माँ की ही महिमा है। पूरा ब्रह्मांड उनके पेट में एक बर्तन की तरह समाया हुआ है। वे ही इस जीवन रूपी नाटक की सूत्रधार हैं और इसे चलाती हैं। वे हमारे अंदर ज्ञान का दीपक जलाती हैं। वे भगवान विश्वनाथ यानी शिव के मन को भी प्रसन्न करती हैं। वे ही काशी नगर की रानी हैं। हे माँ अन्नपूर्णेश्वरी! कृपा करके मुझे सहारा दीजिए और ज्ञान की भिक्षा दीजिए। जब हम यह समझ जाते हैं कि जीवन माँ का एक खेल है, तो हम सुख-दुःख में एक समान रहना सीख जाते हैं।
ज्ञान का प्रकाश माँ की कृपा का एक छोटा सा अंकुर है, जो अज्ञान के अंधेरे को मिटा देता है।
आदिक्षान्तसमस्तवर्णकरी शम्भुप्रिया शाङ्करी
काश्मीरत्रिपुरेश्वरी त्रिनयनी विश्वेश्वरी शर्वरी।
स्वर्गद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
भाषा और ज्ञान की शुरुआत कहाँ से होती है? 'अ' से लेकर 'क्ष' तक के सभी अक्षर माँ का ही स्वरूप हैं। वे भगवान शिव की प्रिय हैं और सबका कल्याण करती हैं। वे कश्मीर की त्रिपुरसुंदरी देवी हैं। उनकी तीन आँखें हैं, जो भूत, वर्तमान और भविष्य देख सकती हैं। वे पूरे विश्व की स्वामिनी हैं। वे ही भक्तों के लिए स्वर्ग के दरवाज़े खोल देती हैं। वे काशी की महारानी हैं। हे कृपा का सहारा देने वाली माँ अन्नपूर्णेश्वरी! मुझे अपनी भक्ति की भिक्षा दीजिए। वर्णमाला का हर अक्षर एक मंत्र है, और इन सबकी शक्ति माँ ही हैं। वे हमें केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करती हैं।
हमारे द्वारा बोला गया हर शब्द माँ की शक्ति का ही एक रूप है।
उर्वीसर्वजनेश्वरी जयकरी माता कृपासागरी
नारी नीलसमानकुन्तलधरी नित्यान्नदानेश्वरी।
साक्षान्मोक्षकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
माँ का प्रेम और उनकी दया हर किसी के लिए है। वे इस धरती के सभी लोगों की ईश्वरी हैं। वे हमेशा विजय प्राप्त करती हैं और कृपा का सागर हैं। उनके बाल नीले आकाश के समान गहरे और सुंदर हैं। वे हमेशा अन्न का दान करती रहती हैं। वे साक्षात मोक्ष देने वाली हैं और हमेशा शुभ ही करती हैं। वे काशी नगर की रानी हैं। हे कृपा का सहारा देने वाली माँ अन्नपूर्णेश्वरी! मुझे अपनी शरण की भिक्षा दीजिए। यहाँ अन्न का मतलब सिर्फ खाने वाला भोजन नहीं, बल्कि आत्मा को मिलने वाला पोषण भी है। माँ की शरण में जाने से ही सच्चा मोक्ष मिलता है, जो सभी दुखों का अंत है।
माँ की कृपा एक सागर की तरह है, हम जितना बड़ा पात्र लेकर जाएँगे, उतना ही भर पाएँगे।
देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी
वामा स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी।
भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
माँ का हर रूप हमें कुछ सिखाता है। देवी ने कई तरह के अनोखे रत्न धारण किए हैं। वे राजा दक्ष की पुत्री, सुंदर दाक्षायणी हैं। वे भगवान शिव का वाम अंग हैं, यानी उनकी शक्ति। वे अपने भक्तों का पोषण करती हैं। वे सौभाग्य देने वाली माहेश्वरी हैं। वे भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं और हमेशा कल्याण करती हैं। वे काशी नगर की रानी हैं। हे माँ अन्नपूर्णेश्वरी! कृपा करके मुझे अपनी भक्ति की भिक्षा दीजिए। भक्तों की सबसे बड़ी इच्छा यही होती है कि उनके मन में ईश्वर के प्रति प्रेम बना रहे। माँ हमारी छोटी-छोटी इच्छाओं के साथ उस सबसे बड़ी इच्छा को भी पूरा करती हैं।
माँ भक्त की हर इच्छा पूरी करती है, विशेषकर ईश्वर को पाने की इच्छा।
चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशी चन्द्रांशुबिम्बाधरी
चन्द्रार्काग्निसमानकुण्डलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी।
मालापुस्तकपाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
माँ का तेज और प्रकाश अतुलनीय है। उनका तेज करोड़ों सूर्य, चंद्रमा और अग्नि के समान है। उनके होंठ चंद्रमा की शीतल किरणों की तरह सुंदर हैं। उन्होंने सूर्य, चंद्रमा और अग्नि के समान चमकने वाले कुंडल पहने हैं। वे अपने हाथों में माला, पुस्तक, पाश और अंकुश धारण करती हैं। वे काशी नगर की रानी हैं। हे माँ अन्नपूर्णेश्वरी! मुझे कृपा की भिक्षा दीजिए। उनके हाथों में रखी हर चीज़ का गहरा अर्थ है। पुस्तक ज्ञान का, माला ध्यान का, पाश मन पर नियंत्रण का और अंकुश सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा का प्रतीक है। वे हमें साधना के सभी साधन प्रदान करती हैं।
आध्यात्मिक यात्रा के लिए ज़रूरी हर साधन माँ ने हमें पहले से ही दे रखा है।
क्षत्रत्राणकरी महाभयहरी माता कृपासागरी
सर्वानन्दकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी।
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥
जीवन के हर डर का अंत माँ की शरण में है। वे धर्म और न्याय की रक्षा करती हैं। वे बड़े से बड़े भय को दूर करने वाली हैं। वे कृपा का सागर हैं। वे सबको आनंद देती हैं और हमेशा कल्याण ही करती हैं। वे संसार की स्वामिनी और धन-वैभव देने वाली हैं। उन्होंने दक्ष प्रजापति के अहंकार को रुलाया था। वे हमें निरोगी काया देती हैं। वे काशी की रानी हैं। हे माँ अन्नपूर्णेश्वरी! मुझे अपनी कृपा की भिक्षा दीजिए। यहाँ निरोगी होने का मतलब सिर्फ शरीर से स्वस्थ होना नहीं है, बल्कि जन्म-मृत्यु के रोग से मुक्त होना भी है। वे अहंकार को नष्ट करती हैं, चाहे वह किसी का भी हो, क्योंकि अहंकार ही सबसे बड़ा दुख है।
माँ की कृपा वही करती है जो हमारे लिए कल्याणकारी है, भले ही वह हमें तुरंत पसंद न आए।
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी
मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी।
काश्मीरागरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मैकनिष्ठाकरी
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी।
सर्वैश्वर्यकरी तपःफलकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी ह्युमा शाङ्करी
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ह्योङ्कारबीजाक्षरी।
मोक्षद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी
लीलानाटकसूत्रखेलनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी।
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
आदिक्षान्तसमस्तवर्णकरी शम्भुप्रिया शाङ्करी
काश्मीरत्रिपुरेश्वरी त्रिनयनी विश्वेश्वरी शर्वरी।
स्वर्गद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
उर्वीसर्वजनेश्वरी जयकरी माता कृपासागरी
नारी नीलसमानकुन्तलधरी नित्यान्नदानेश्वरी।
साक्षान्मोक्षकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी
वामा स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी।
भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशी चन्द्रांशुबिम्बाधरी
चन्द्रार्काग्निसमानकुण्डलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी।
मालापुस्तकपाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।
क्षत्रत्राणकरी महाभयहरी माता कृपासागरी
सर्वानन्दकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी।
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।