अष्ट महिषी कृष्ण स्तोत्र

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आपकी सेवा से सनातन धर्म का भविष्य उज्ज्वल है 🌟 -mayank pandey

वेदधारा के माध्यम से मिले सकारात्मकता और विकास के लिए आभारी हूँ। -Varsha Choudhry

वेदधारा के साथ ऐसे नेक काम का समर्थन करने पर गर्व है - अंकुश सैनी

यह वेबसाइट ज्ञान का खजाना है। 🙏🙏🙏🙏🙏 -कीर्ति गुप्ता

सनातन धर्म के भविष्य के लिए वेदधारा के नेक कार्य से जुड़कर खुशी महसूस हो रही है -शशांक सिंह

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हृद्गुहाश्रितपक्षीन्द्र- वल्गुवाक्यैः कृतस्तुते।
तद्गरुत्कन्धरारूढ रुक्मिणीश नमोऽस्तु ते।
अत्युन्नताखिलैः स्तुत्य श्रुत्यन्तात्यन्तकीर्तित।
सत्ययोजितसत्यात्मन् सत्यभामापते नमः।
जाम्बवत्याः कम्बुकण्ठालम्ब- जृम्भिकराम्बुज।
शम्भुत्र्यम्बकसम्भाव्य साम्बतात नमोऽस्तु ते।
नीलाय विलसद्भूषा- जलयोज्ज्वालमालिने।
लोलालकोद्यत्फालाय कालिन्दीपतये नमः।
जैत्रचित्रचरित्राय शात्रवानीकमृत्यवे।
मित्रप्रकाशाय नमो मित्रविन्दाप्रियाय ते।
बालनेत्रोत्सवानन्त- लीलालावण्यमूर्तये।
नीलाकान्ताय ते भक्तवालायास्तु नमो नमः।
भद्राय स्वजनाविद्यानिद्रा- विद्रवणाय वै।
रुद्राणीभद्रमूलाय भद्राकान्ताय ते नमः।
रक्षिताखिलविश्वाय शिक्षिताखिलरक्षसे।
लक्षणापतये नित्यं भिक्षुश्लक्ष्णाय ते नमः।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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