सौरी पंचक स्तोत्र

समस्तकामार्थ- विधायिनं विभुं
सुखासनस्थान- ममर्त्यरूपिणम्।
घनाकृतिं मेचकवस्त्रधारिणं
शनैश्चरं नौमि दिवाकरात्मजम्।
वरेण्यमाशाम्बर- मादिवन्दितं
सुवर्णभूषाभर- कण्ठहारिणम्।
खद्योतमाकाशचरं सदा वरं
शनैश्चरं नौमि दिवाकरात्मजम्।
सुबोधितं वज्रशरीरिणं प्रभुं
विरागदं चञ्चलमानसं परम्।
महाशयं मर्त्यशुभाभिचिन्तकं
शनैश्चरं नौमि दिवाकरात्मजम्।
कुरूपिणं रोगविनाशकं ग्रहं
यमाग्रजं गृध्रवहं गुणान्वितम्।
यशस्विनं गोचरसत्फलप्रदं
शनैश्चरं नौमि दिवाकरात्मजम्।
विधिस्तुतं वैदिकमन्त्रपूजितं
वरिष्ठमापत्सु सुरक्षकं सुरम्।
वशीकृतप्राज्ञ- मनाथनायकं
शनैश्चरं नौमि दिवाकरात्मजम्।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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Om namo Bhagwate Vasudevay Om -Alka Singh

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