एक श्लोकी नवग्रह स्तोत्र

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आधारे प्रथमे सहस्रकिरणं ताराधवं स्वाश्रये
माहेयं मणिपूरके हृदि बुधं कण्ठे च वाचस्पतिम्।
भ्रूमध्ये भृगुनन्दनं दिनमणेः पुत्रं त्रिकूटस्थले
नाडीमर्मसु राहु-केतु-गुलिकान्नित्यं नमाम्यायुषे।

 

मूलाधार में सूर्य को,
स्वाधिष्ठान में चंद्र को,
मणिपुर में मंगल को,
अनाहत में बुध को,
विशुद्ध में बृहस्पति को,
आज्ञा में शुक्र को,
सहस्रार में शनैश्चर को,
मर्मस्थानों में राहु-केतु और गुलिक को,
मैं नमस्कार करता हूं।
वे मुझे आयु प्रदान करें।

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