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आञ्जनेय मंगल अष्टक स्तोत्र

कपिश्रेष्ठाय शूराय सुग्रीवप्रियमन्त्रिणे।
जानकीशोकनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
मनोवेगाय उग्राय कालनेमिविदारिणे।
लक्ष्मणप्राणदात्रे च आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
महाबलाय शान्ताय दुर्दण्डीबन्धमोचन।
मैरावणविनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
पर्वतायुधहस्ताय रक्षःकुलविनाशिने।
श्रीरामपादभक्ताय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
विरक्ताय सुशीलाय रुद्रमूर्तिस्वरूपिणे।
ऋषिभिः सेवितायास्तु आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
दीर्घबालाय कालाय लङ्कापुरविदारिणे।
लङ्कीणीदर्पनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
नमस्तेऽस्तु ब्रह्मचारिन् नमस्ते वायुनन्दन।
नमस्ते गानलोलाय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
प्रभवाय सुरेशाय शुभदाय शुभात्मने।
वायुपुत्राय धीराय आञ्जनेयाय मङ्गलम्।
आञ्जनेयाष्टकमिदं यः पठेत् सततं नरः।
सिद्ध्यन्ति सर्वकार्याणि सर्वशत्रुविनाशनम्।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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