कामाक्षी स्तोत्र

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कामाक्षि मातर्नमस्ते। कामदानैकदक्षे स्थिते भक्तपक्षे। कामाक्षिमातर्नमस्ते।
कामारिकान्ते कुमारि। कालकालस्य भर्तुः करे दत्तहस्ते।
कामाय कामप्रदात्रि। कामकोटिस्थपूज्ये गिरं देहि मह्यम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
श्रीचक्रमध्ये वसन्तीम्। भूतरक्षःपिशाचादिदुःखान् हरन्तीम्।
श्रीकामकोट्यां ज्वलन्तीम्। कामहीनैः सुगम्यां भजे देहि वाचम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
इन्द्रादिमान्ये सुधन्ये। ब्रह्मविष्ण्वादिवन्द्ये गिरीन्द्रस्य कन्ये।
मान्यां न मन्ये त्वदन्याम्। मानिताङ्घ्रिं मुनीन्द्रैर्भजे मातरं त्वाम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
सिंहाधिरूढे नमस्ते। साधुहृत्पद्मगूढे हताशेषमूढे।
रूढं हर त्वं गदं मे। कण्ठशब्दं दृढं देहि वाग्वादिनि त्वम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
कल्याणदात्रीं जनित्रीम्। कञ्जपत्राभनेत्रां कलानादवक्त्राम्।
श्रीस्कन्दपुत्रां सुवक्त्राम्। सच्चरित्रां शिवां त्वां भजे देहि वाचम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
श्रीशङ्करेन्द्रादिवन्द्याम्। शङ्करां साधुचित्ते वसन्तीं सुरूपाम्।
सद्भावनेत्रीं सुनेत्राम्। सर्वयज्ञस्वरूपां भजे देहि वाचम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
भक्त्या कृतं स्तोत्ररत्नम्। ईप्सितानन्दरागेन देवीप्रसादात्।
नित्यं पठेद्भक्तिपूर्णम्। तस्य सर्वार्थसिद्धिर्भवेदेव नूनम्। कामाक्षि मातर्नमस्ते।
देवि कामाक्षि मातर्नमस्ते। देवि कामाक्षि मातर्नमस्ते।

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