गौरी स्तुति

अभिनव- नित्याममरसुरेन्द्रां
विमलयशोदां सुफलधरित्रीम्।
विकसितहस्तां त्रिनयनयुक्तां
नयभगदात्रीं भज सरसाङ्गीम्।
अमृतसमुद्रस्थित- मुनिनम्यां
दिविभवपद्मायत- रुचिनेत्राम्।
कुसुमविचित्रार्चित- पदपद्मां
श्रुतिरमणीयां भज नर गौरीम्।
प्रणवमयीं तां प्रणतसुरेन्द्रां
विकलितबिम्बां कनकविभूषाम्।
त्रिगुणविवर्ज्यां त्रिदिवजनित्रीं
हिमधरपुत्रीं भज जगदम्बाम्।
स्मरशतरूपां विधिहरवन्द्यां
भवभयहत्रीं सवनसुजुष्टाम्।
नियतपवित्रामसि- वरहस्तां
स्मितवदनाढ्यां भज शिवपत्नीम्।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

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