कावेरी स्तोत्र

कथं सह्यजन्ये सुरामे सजन्ये
प्रसन्ने वदान्या भवेयुर्वदान्ये।
सपापस्य मन्ये गतिञ्चाम्ब मान्ये
कवेरस्य धन्ये कवेरस्य कन्ये।
कृपाम्बोधिसङ्गे कृपार्द्रान्तरङ्गे
जलाक्रान्तरङ्गे जवोद्योतरङ्गे।
नभश्चुम्बिवन्येभ- सम्पद्विमान्ये
नमस्ते वदान्ये कवेरस्य कन्ये।
समा ते न लोके नदी ह्यत्र लोके
हताशेषशोके लसत्तट्यशोके।
पिबन्तोऽम्बु ते के रमन्ते न नाके
नमस्ते वदान्ये कवेरस्य कन्ये।
महापापिलोकानपि स्नानमात्रान्
महापुण्यकृद्भिर्महत्कृत्यसद्भिः।
करोष्यम्ब सर्वान् सुराणां समानान्
नमस्ते वदान्ये कवेरस्य कन्ये।
अविद्यान्तकर्त्री विशुद्धप्रदात्री
सस्यस्यवृद्धिं तथाऽऽचारशीलम्।
ददास्यम्ब मुक्तिं विधूय प्रसक्तिं
नमस्ते वदान्ये कवेरस्य कन्ये।

 

Ramaswamy Sastry and Vighnesh Ghanapaathi

63.9K

Comments Hindi

vweu4
आपकी वेबसाइट से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।🙏 -आर्या सिंह

वेदधारा के कार्यों से हिंदू धर्म का भविष्य उज्जवल दिखता है -शैलेश बाजपेयी

आपकी वेबसाइट से बहुत कुछ जानने को मिलता है।🕉️🕉️ -नंदिता चौधरी

हिंदू धर्म के पुनरुद्धार और वैदिक गुरुकुलों के समर्थन के लिए आपका कार्य सराहनीय है - राजेश गोयल

आप जो अच्छा काम कर रहे हैं उसे जानकर बहुत खुशी हुई -राजेश कुमार अग्रवाल

Read more comments

Other stotras

Copyright © 2024 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |