धनिष्ठा नक्षत्र

Dhanishta Nakshatra symbol drum

  

मकर राशि के २३ अंश २० कला से कुंभ॒ राशि के ६ अंश ४० कला तक जो नक्षत्र व्याप्त है, उसे धनिष्ठा कहते हैं।

वैदिक खगोल विज्ञान में यह तेईसवां नक्षत्र है। 

आधुनिक खगोल विज्ञान के अनुसार धनिष्ठा नक्षत्र का नाम है α Sualocin to δ Delphini।

व्यक्तित्व और विशेषताएं  

धनिष्ठा मकर एवं कुंभ राशि दोनों के लिए

  • श्रीमान
  • उदार
  • ऊर्जावान
  • लालची
  • तीक्ष्ण बुद्धि
  • महत्त्वाकांक्षी
  • स्वास्थ्य की अनदेखी
  • जीवन में पैसा कमाना सबसे पहली प्राथमिकता मानने वाला
  • स्वतंत्र विचारधारा
  • काम में निपुण
  • धर्म में रुचि
  • मतलबी
  • वफादारी की कमी
  • आत्मविश्वास
  • रहस्य रखने की क्षमता
  • परिवार - उन्मुख
  • प्रतिशोधपूर्ण
  • कर्कश

सिर्फ धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि के लिए

  • जागरूक
  • सक्रिय
  • साहसी
  • प्रभावशाली 

सिर्फ धनिष्ठा नक्षत्र कुंभ राशि के लिए

  • मिलनसार
  • हाजिरजवाब
  • जिज्ञासु
  • गुस्सैल 

प्रतिकूल नक्षत्र

  • पूर्वा भाद्रपद
  • रेवती
  • भरणी
  • धनिष्ठा मकर राशि के लिए - मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी सिंह राशि
  • धनिष्ठा कुंभ राशि के लिए - उत्तरा फाल्गुनी कन्या राशि, हस्त, चित्रा कन्या राशि

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वालों को इन दिनों महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए और इन नक्षत्रों में जन्मे लोगों के साथ भागीदारी नहीं करना चाहिए। 

स्वास्थ्य

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वालों को इन स्वास्थ्य से संबन्धित समस्याओं की संभावना है- 

धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि

  • पैर की चोट
  • फोड़े
  • हिचकी
  • मतली 

धनिष्ठा नक्षत्र कुंभ राशि

  • पैर की चोट
  • रक्त विकार
  • धड़कन
  • बेहोशी
  • हृदय रोग
  • रक्तचाप
  • वैरिकाज़ 

व्यवसाय

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वालों के लिए कुछ अनुकूल व्यवसाय- 

धनिष्ठा मकर राशि

  • डॉक्टर
  • खनन
  • भूविज्ञान
  • इंजीनियर
  • श्रम विभाग
  • पुनर्वासन
  • जेल अधिकारी
  • उत्पादन
  • उपकरण
  • स्पेयर पार्ट्स
  • सीमेंट
  • खनिज
  • शीशा उद्योग
  • शराब
  • जूट 

धनिष्ठा कुंभ राशि

  • टी.वी.
  • फोन
  • बिजली
  • आणविक विज्ञान
  • शोध
  • कूरियर
  • मुद्रण
  • जांच-पड़ताल
  • खेती
  • रेशम
  • जूट उद्योग
  • खनन
  • आयरन स्टील
  • चमडा
  • पुलिस
  • रक्षा सेवा
  • बचाव सेवा

क्या धनिष्ठा नक्षत्र वाला व्यक्ति हीरा धारण कर सकता है?

हां

भाग्यशाली रत्न

मूंगा

अनुकूल रंग

लाल, काला, गहरा नीला

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम

धनिष्ठा नक्षत्र के लिए अवकहडादि पद्धति के अनुसार नाम का प्रारंभिक अक्षर हैं-

  • पहला चरण - गा
  • दूसरा चरण - गी
  • तीसरा चरण - गू
  • चौथा चरण - गे

नामकरण संस्कार के समय रखे जाने वाले पारंपरिक नक्षत्र-नाम के लिए इन अक्षरों का उपयोग किया जा सकता है।

शास्त्र के अनुसार नक्षत्र-नाम के अलावा एक व्यावहारिक नाम भी होना चाहिए जो रिकॉर्ड में आधिकारिक नाम रहेगा। उपरोक्त प्रणाली के अनुसार रखे जाने वाला नक्षत्र-नाम केवल परिवार के करीबी सदस्यों को ही पता होना चाहिए।

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वालों के व्यावहारिक नाम इन अक्षरों से प्रारंभ न करें -

  • धनिष्ठा मकर राशि - स, ओ, औ, ट, ठ, ड, ढ।
  • धनिष्ठा कुंभ राशि - ए, ऐ, ह, अं, क्ष, त, थ, द, ध, न।

वैवाहिक जीवन

वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। 

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मी महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। 

उपाय

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वालों के लिए बुध, बृहस्पति और शुक्र की दशाएं आमतौर पर प्रतिकूल होती हैं। वे 

निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं।

मंत्र

ॐ वसुभ्यो नमः

धनिष्ठा नक्षत्र

  • स्वामी - वसु
  • अधीश ग्रह - मंगल
  • पशु - मनुष्य
  • वृक्ष - खेजडी
  • पक्षी - मोर
  • भूत - आकाश
  • गण - मनुष्य
  • योनि - शेर (स्त्री)
  • नाडी - मध्य
  • प्रतीक - ड्रम

 

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Comments

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गुरुजी का शास्त्रों की समझ गहरी और अधिकारिक है 🙏 -चितविलास

वेदधारा की वजह से हमारी संस्कृति फल-फूल रही है 🌸 -हंसिका

वेदधारा की धर्मार्थ गतिविधियों का हिस्सा बनकर खुश हूं 😇😇😇 -प्रगति जैन

सनातन धर्म के भविष्य के लिए वेदधारा का योगदान अमूल्य है 🙏 -श्रेयांशु

वेदधारा की धर्मार्थ गतिविधियों में शामिल होने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं - समीर

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Who wrote Bhakti Ratnavali?

Bhakti Ratnavali was written by Vishnu Puri of Mithila under instruction from Chaitanya Mahaprabhu. It is a collection of all verses pertaining to bhakti from Srimad Bhagavata.

इल्वल और वातापी कौन थे?

स्कंद पुराण के अनुसार इल्वल और वातापी ऋषि दुर्वासा और अजमुखी के पुत्र हैं। उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे अपनी सारी शक्ति उन्हें दे दें । दुर्वासा को क्रोध आ गया और उन्होंने श्राप दिया कि वे अगस्त्य के हाथों मर जाएंगे।

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भगवद्गीता किस ग्रन्थ के अन्तर्गत है ?
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