महाजनस्य संसर्गः

महाजनस्य संसर्गः

महाजनस्य संसर्गः कस्य नोन्नतिकारकः |
पद्मपत्रस्थितं तोयं धत्ते मुक्ताफलश्रियम् ||

 

महान् व्यक्तियों का संसर्ग सब का भला करता है | जिस प्रकार से कमल के पत्ते के ऊपर रहता हुआ पानी का बूंद मोती के समान यश को प्राप्त करता उसी प्रकार महान् व्यक्तियों के साथ रहने वाले लोग भी उन के कारण से यश को प्राप्त करते हैं |

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