विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा

विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा
सदसि वाक्पटुता युधि विक्रमः |
यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ
प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम् ||

विपदाओं के आने पर धैर्य, समुन्नति के आने पर क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध होने पर पराक्रम, यश में रुचि और वेदों में आसक्ति - ये गुण अपने आप ही महात्माओं में होते हैं |

 

 

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