गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति

गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः ।
सुस्वादुतोयाः प्रभवन्ति नद्यः समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः ॥

 

कोई भी गुण, अच्छे लोगों के पास पहुंचकर अच्छे गुण बनते हैं और वे ही गुण बुरे लोगों पास जाकर दोष बन जाते हैं । जिस प्रकार से एक ही पानी नदियों में मिलकर मीठा और पीने योग्य बन जाता है और वह ही पानी समंदर में मिलकर नमकीन और पीने के लिए अयोग्य बन जाता है, वैसे ही गुण भी सही और गलत मनुष्यों से ही अच्छे और बुरे बन जाते हैं ।

 

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सरल अनुवाद के लिए धन्यवाद ! -विकास कुमार चौरसिया

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कुंडेश्वर महादेव का मंत्र

कुंडेश्वर महादेव की आरादना ॐ नमः शिवाय - इस पंचाक्षर मंत्र से या ॐ कुण्डेश्वराय नमः - इस नाम मंत्र से की जा सकती है।

गोवत्स द्वादशी की कहानी क्या है?

एक बार माता पार्वती गौ माता के और भोलेनाथ एक बूढे के रूप में भृगु महर्षि के आश्रम पहुंचे। गाय और बछडे को आश्रम में छोडकर महादेव निकल पडे। थोडी देर बाद भोलेनाथ खुद एक वाघ के रूप में आकर उन्हें डराने लगे। डर से गौ और बछडा कूद कूद कर दौडे तो उनके खुरों का निशान शिला के ऊपर पड गया जो आज भी ढुंढागिरि में दिखाई देता है। आश्रम में ब्रह्मा जी का दिया हुआ एक घंटा था जिसे बजाने पर भगवान परिवार के साथ प्रकट हो गए। इस दिन को गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाते हैं।

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