स्वयमेव मृगेन्द्रता

नाऽभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने|
विक्रमार्जितसत्त्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता|

 

शेर का वन में कोई राजाभिषेक नहीं करता| जैसे मनुष्यों के राजा का संस्कार होता है वैसे कोई संस्कार भी शेर का वन में किया नहीं जाता| फिर भी वह बाकी मृगों के द्वारा एनं का राजा माना जाता है| क्योंकि शेर ने वह राज्य अपने पराक्रम से प्राप्त किया है| ऐसे ही जिस चीज को हम पराक्रम से, अपने बल से प्राप्त करते हैं, वह हमारा होता है|

 

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शकुंतला और पांडव कैसे संबंधित हैं?

राजा भरत पाडवों के पूर्वज थे। शकुंतला उनकी मां थी।

पति के किस तरफ होना चाहिए पत्नी?

सारे धार्निक शुभ कार्यों में पत्नी पति के दक्षिण भाग में रहें, इन्हें छोडकर- १. अभिषेक या अपने ऊपर कलश का तीर्थ छिडकते समय। २. ब्राह्मणॊं के पैर धोते समय। ३. ब्राह्मणों से आशीर्वाद स्वीकार करते समय। ४. सिन्दूर देते समय। ५ शांति कर्मों में। ६. मूर्ति प्रतिष्ठापन में। ७. व्रत के उद्यापन में। ८. विवाह होकर माता-पिता के घर से निकलते समय। ९. विवाह होकर पहली बार माता-पिता के घर वापस आते समय। १०. भोजन करते समय। ११. सोते समय।

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इनमें से दीर्घायु के लिये प्रसिद्ध मंत्र कौनसा है ?
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