मनस्येकं वचस्येकम्

मनस्येकं वचस्येकं कर्मण्येकं महात्मनाम् |
मनस्यन्यद् वचस्यन्यत् कर्मण्यन्यद् दुरात्मनाम् ||

 

अच्छे लोगों के मन में, वाणी में और क्रिया में एक ही चीज होती है| वे जो सोचते हैं वह ही बोलते हैं और जो बोलते हैं वह ही करते हैं| बुरे लोगों के मन में अलग चीज, वाणी में अलग चीज और क्रिया में अलग चीज होती है| वे सोचते कुछ हैं, बोलते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं|

 

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वेङ्कटेश सुप्रभातम् की रचना कब हुई?

वेङ्कटेश सुप्रभातम् की रचना ईसवी सन १४२० और १४३२ के बीच में हुई थी।

कीडे मकोडों का विष उतारने का मंत्र क्या है?

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ॐ स्वाहा ॐ गरुड सं हुँ फट् । किसी रविवार या मंगलवार के दिन इस मंत्र को दस बर जपें और दस आहुतियां दें। इस प्रकार मंत्र को सिद्ध करके जरूरत पडने पर मंत्र पढते हुए फूंक मारकर भभूत छिडकें ।

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ब्रह्मास्त्र को किस मंत्र से ऊर्जित किया जाता है ?
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