यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राऽफलाः क्रियाः ।।

 

जिस स्थान पर स्त्रियों की पूजा होती है, उस स्थान पर ही सभी देवता प्रसन्न होते हैं । जिस स्थान पर स्त्रियों की पूजा नहीं होती, उस स्थान पर किये गए कर्म निष्फल बन जाते हैं ।

 

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pbney
वेदधारा की सेवा समाज के लिए अद्वितीय है 🙏 -योगेश प्रजापति

बहुत बढिया चेनल है आपका -Keshav Shaw

वेदधारा से जुड़ना एक आशीर्वाद रहा है। मेरा जीवन अधिक सकारात्मक और संतुष्ट है। -Sahana

आप जो अच्छा काम कर रहे हैं, उसे देखकर बहुत खुशी हुई 🙏🙏 -उत्सव दास

सनातन धर्म के भविष्य के प्रति आपकी प्रतिबद्धता अद्भुत है 👍👍 -प्रियांशु

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दक्षिण-पूर्व दिशा कौन सी होती है?

किसी घर या भूखंड की पूर्व और दक्षिण दिशाएं जहां मिलती हैं उस स्थान को दक्षिण-पूर्व कहते हैं । वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पूर्व दिशा को आग्नेय कोण भी कहते हैं।

संजीवनी मंत्र क्या है?

ॐ जूँ सः ईँ सौः हँसः सञ्जीवनि सञ्जीवनि मम हृदयग्रन्थिस्थँ प्राणँ कुरु कुरु सोहँ सौः ईँ सः जूँ ॐ ॐ जूँ सः अमृठोँ नमश्शिवाय ।

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लड़कियों के लिये उपनयन के स्थान में कौन सा संस्कार होता है ?
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