अभिवादनशीलस्य

अभिवादनशीलस्य

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः |
चत्वारि तस्य वर्धन्त आयुर्विद्या यशो बलम् ||

 

जो हमेशा अपने से से बडों को नमस्कार कर के उन की सेवा करता है, उस की आयु, विद्या, यश और बल की वृद्धि होती है |

 

हिन्दी

हिन्दी

सुभाषित

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies