फलं सुहृदनुग्रहम्

उदयन्नेव सविता पद्मेष्वर्पयति श्रियम् ।
विभावयन् समृद्धीनां फलं सुहृदनुग्रहम् ।।

जैसे ही सूरज उदित होता है, तो अपनी रश्मियों से कमल को खिलाता है । अच्छे मित्रता की यह ही खासियत है ।

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