परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति

परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति

उडुगणपरिवारो नायकोsप्योषधीनाममृतमयशरीरः कान्तियुक्तोsपि चन्द्रः ।
भवति विगतरश्मिर्मण्डलं प्राप्य भानोः परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति ।।

चन्द्रमा का सारा तारागण परिवार है, वह औषधियों का नायक है, उसका शरीर अमृत से बना हुआ है और वह रात में प्रकाशमान होकर पूरे लोक को प्रकाश देता है । फिर भी सूर्य के बहुत निकट जाने पर वह अपना प्रकाश खो बैठता है । ऐसे ही दूसरों के स्थान पर जाने पर चाहे कोई कितना भी बडा हो, वह छोटा बन ही जाता है ।

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