अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः

अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका ।
तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः ।।

जिस प्रकार छोटे छोटे सूखे घास के टुकडों से बना रस्सी एक हाथी तक को बांध सकती है वैसे ही छोटे छोटे कर्मों के करते रहने से बडा लक्ष्य पाया जा सकता है ।

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