सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्|
प्रियञ्च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः|
 
 
सच कहो, लेकिन सिर्फ उस सच को कहो जो दूसरों को अच्छा लगे| ऐसे सच को मत कहो जिससे दूसरों को बुरा लगे| दूसरों को अच्छा लगता है - इस कारण से झूठ मत कहो| यह ही सर्वदा सनातन धर्म के नियम हैं|
 
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वसुदेव और देवकी पूर्व जन्म में क्या थे?

सबसे पहले वसुदेव, प्रजापति सुतपा थे और देवकी उनकी पत्नी पृश्नि। उस समय भगवान ने पृश्निगर्भ के रूप में उनका पुत्र बनकर जन्म लिया। उसके बाद उस दंपति का पुनर्जन्म हुआ कश्यप - अदिति के रूप में। भगवान बने उनका पुत्र वामन। तीसरा पुनर्जन्म था वसुदेव - देवकी के रूप में।

यज्ञ के लिए अयोग्य देश

गवां वा ब्राह्मणानां वा वधो यत्र च दस्युभिः। असावयज्ञियो देशः - जिस देश में दुष्टों द्वारा गौ और तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का वध होता है, वह देश यज्ञ के लिए योग्य नहीं है।

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किस भगवान के ध्वज में कुक्कुट ( मुर्गा ) का चिह्न है ?
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