पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्|
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते|

 

इस भूलोक पर तीन ही चीज रत्न कहलाते हैं| पहला है पानी, दूसरा है भोजन और तीसरा है सुभाषित| मूर्ख लोग पत्थर के टुकडें ही रत्न हैं ऐसा समझते हैं|

 

92.7K

Comments

if2in
From where this shlok is derived? -Prashant
Subhashita Ratna Bhandagar Replied by Vedadhara

वेदधारा समाज के लिए एक महान सेवा है -शिवांग दत्ता

आपकी सेवा से सनातन धर्म का भविष्य उज्ज्वल है 🌟 -mayank pandey

यह वेबसाइट ज्ञान का अद्वितीय स्रोत है। -रोहन चौधरी

बहुत प्रेरणादायक 👏 -कन्हैया लाल कुमावत

Read more comments

मरने के बाद बाल क्यों देते हैं?

मानव के सारे पाप उसके बालों पर स्थित रहते हैं। इसलिए शुद्ध होने और पापों से मुक्त होने के लिए बन्धु बान्धव जन अंत्येष्टि के बाद बाल देते हैं।

शिव शाबर मंत्र क्या है?

ॐ आद भैरव, जुगाद भैरव। भैरव है सब थाई भैरों ब्रह्मा । भैरों विष्ण, भैरों ही भोला साईं । भैरों देवी, भैरों सब देवता । भैरों सिद्धि भैरों नाथ भैरों गुरु । भैरों पीर, भैरों ज्ञान, भैरों ध्यान, भैरों योग-वैराग भैरों बिन होय, ना रक्षा, भैरों बिन बजे ना नाद। काल भैरव, विकराल भैरव । घोर भैरों, अघोर भैरों, भैरों की महिमा अपरम्पार श्वेत वस्त्र, श्वेत जटाधारी । हत्थ में मुगदर श्वान की सवारी। सार की जंजीर, लोहे का कड़ा। जहाँ सिमरुँ, भैरों बाबा हाजिर खड़ा । चले मन्त्र, फुरे वाचा देखाँ, आद भैरो ! तेरे इल्मी चोट का तमाशा ।

Quiz

शिक्षा नामक वेदाङ्ग में क्या बताया गया है ?
Hindi Topics

Hindi Topics

सुभाषित

Click on any topic to open

Copyright © 2024 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |