एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते

एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते

यः प्रीणयेत्सुचरितैः पितरं स पुत्रो
यद्भर्तुरेव हितमिच्छति तत्कलत्रम् ।
तन्मित्रमापदि सुखे च समक्रियं यत्
एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते ॥

वह पुत्र है जो अपने अच्छे चरित्र से पिता का नाम रौशन करें । वह पत्नी है जो हर अवस्था में अपने पति के हित के बारे में सोचे । वह मित्र है जो अच्छे और बुरे समय में एक जैसा व्यवहार करें । और जिस व्यक्ति को दुनियां में ये तीनो साथ में मिल जाए, वह पुण्यवान है ।

हिन्दी

हिन्दी

सुभाषित

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies