गुणेषु क्रियतां यत्नः

गुणेषु क्रियतां यत्नः किमाटोपैः प्रयोजनम् |
विक्रीयन्ते न घण्टाभिर्गावः क्षीरविवर्जिताः ||


अगर प्रयास करना हो तो अपने अंदर विद्यमान अच्छे गुणों को बढाने का प्रयास कीजिए | बाकी के आडम्बरों से कोई प्रयोजन नहीं मिलने वाला | जो गाय दूध न देती हो उसके गले पर मणि बांधने से कोई उसे खरीद नहीं लेगा | इसी प्रकार बिन गुणों के दर्प करने वालों को कोई सम्मान नहीं देगा |

 

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रैवतक पर्वत कहां है?

गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित गिरनार पहाडियां ही रैवतक पर्वत है। इसके बारे में महाभारत.सभापर्व.१४.५० में ऐसा उल्लेख है; कुशस्थलीं पुरीं रम्यां रैवतेनोपशोभिताम्। रैवतक द्वारका को शोभा देनेवाला पर्वत है।

सांपों को विष कहां से मिला ?

श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब भगवान शिव समुद्र मंथन के दौरान निकले हालाहल विष को पी रहे थे, तो उनके हाथ से थोड़ा सा छलक गया। यह सांपों, अन्य जीवों और जहरीली वनस्पतियों में जहर बन गया।

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