Special - Vidya Ganapathy Homa - 26, July, 2024

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योजकस्तत्र दुर्लभः

अमन्त्रमक्षरं नास्ति नास्ति मूलमनौषधम्|
अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः|

 

कोई भी ऐसा अक्षर नहीं है जो किसी मंत्र में उपयुक्त न हो| कोई भी ऐसा जड नही है जो औषधि मे उपयुक्त न हो| ऐसे ही इस संसार में कोई भी ऐसा पुरुष नहीं हो जो नालायक हो| पर सही पुरुष को सही काम मे मार्ग दर्शाने वाले लोग बहुत कम होते हैं|

 

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वेदधारा के माध्यम से मिले सकारात्मकता और विकास के लिए आभारी हूँ। -Varsha Choudhry

बहुत प्रेरणादायक 👏 -कन्हैया लाल कुमावत

वेदधारा का प्रभाव परिवर्तनकारी रहा है। मेरे जीवन में सकारात्मकता के लिए दिल से धन्यवाद। 🙏🏻 -Anjana Vardhan

आपकी मेहनत से सनातन धर्म आगे बढ़ रहा है -प्रसून चौरसिया

हम हिन्दूओं को एकजुट करने के लिए यह मंच बहुत ही अच्छी पहल है इससे हमें हमारे धर्म और संस्कृति से जुड़कर हमारा धर्म सशक्त होगा और धर्म सशक्त होगा तो देश आगे बढ़ेगा -भूमेशवर ठाकरे

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