पापं तापं तथा दैन्यं हन्ति

पापं तापं तथा दैन्यं हन्ति

गङ्गा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा ।

पापं तापं तथा दैन्यं हन्ति सज्जनसङ्गमः‌ ।।

गंगा नदी पाप को मिटाती है, चंद्र ताप को मिटाता है और कल्पतरु दीनता को मिटाती है | पर सज्जनों का संगम इन तीनों को मिटा सकता है |

हिन्दी

हिन्दी

सुभाषित

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies