क्रिया फलवती भवेत्

नाद्रव्ये निहिता काचित् क्रिया फलवती भवेत् ।
न व्यापारशतेनापि शुकवत् पाठ्यते बकः ।।

किसी भी कार्य के सफल होने के लिए उचित साधन और योग्य आधार होना आवश्यक है। बिना उचित पात्रता या क्षमता के, कोई भी प्रयास फल नहीं देता।

जैसे, सौ प्रकार के प्रयास करने पर भी बगुले को तोते की तरह बोलना नहीं सिखाया जा सकता। क्योंकि उसके स्वभाव और क्षमता में वह गुण ही नहीं है।

हिन्दी

हिन्दी

सुभाषित

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies