आत्मवत् सर्वभूतेषु

आत्मवत् सर्वभूतेषु

मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत् ।
आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः ।।

 

दूसरों की स्त्री को जो अपनी माता के समान समझता हो, दूसरों के वस्तुओं को जो मिट्टी के समान समझता हो और दूसरे जन व पशु पक्षि आदि को अपने समान समझता हो वह ही पंडित कहलाता है ।

 

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