
महाभारत की कहानी अब शुरू हो रही है। अब तक हम भूमिका देख रहे थे। अब पौलोम पर्व शुरू होने वाला है। आदि पर्व के अध्याय 4 से लेकर 12 तक हैं पौलोम पर्व।
चौथे अध्याय की शुरुआत में कहा जा रहा है, उग्रश्रवा लोमहर्षण के पुत्र, शौनक महर्षि के 12 साल वाले यज्ञ की वेदी में आ पहुँचे। वे वहाँ ऋषियों के पास गए। उग्रश्रवा बहुत अच्छे से कथा बताते हैं। यहाँ कथा का अर्थ काल्पनिक कहानी नहीं है। उग्रश्रवा जिसे सुनाते हैं, वो हमारा सच्चा इतिहास है। भारतवर्ष का सच्चा इतिहास।
यहाँ पर कुछ विशेष बात है। महाभारत के किसी पाठांतर में "लोमहर्षणपुत्रो उग्रश्रवा सौतिः" इस प्रकार है शुरुआत। किसी पाठांतर में "सौतिरुवाच लोमहर्षणपुत्रो उग्रश्रवा सौतिः" इस प्रकार।
एक में, लोमहर्षण के पुत्र यज्ञवेदी में आ पहुँचे।
दूसरे में, सौति ने कहा लोमहर्षण के पुत्र यज्ञवेदी में आ पहुँचे।
यह कैसे हो सकता है? सौति यानी सूत का बेटा, लोमहर्षण का बेटा। वे खुद कह रहे हैं कि सौति ने कहा, जैसे कि यह घटना पहले कभी घट चुकी है। यह कैसे हो सकता है?
यह सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण आशयों में से एक है। ये सारी घटनाएँ जो अब हमारे आगे-पीछे घट रही हैं, ये सारी घटनाएँ पहले भी घट चुकी हैं। कई बार, हर कल्प में। पहले के हर कल्प में पुनरावृत्ति ही होती जा रही है, जैसे सीरियल, पिक्चर इनका पुनः प्रसारण होता है, ठीक उसी प्रकार।
हर कल्प के शुरू से अंत तक कहानी एक ही है। इसीलिए तो कालचक्र कहते हैं। आपके सामने एक चक्र घूम रहा है। उसके नेमि पर किसी एक बिंदु के ऊपर ध्यान देकर देखिए। वो घूमते-घूमते बार-बार आपके सामने आता रहेगा।
विश्व की घटनाओं का क्रम एक पिक्चर जैसा है। एक बार पिक्चर बन गई तो हर शो में उसी की पुनरावृत्ति होती है।
इसका प्रमाण वेद है: "सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथापूर्वमकल्पयत्। दिवञ्च पृथिवीञ्चान्तरिक्षमथो स्वः॥"
सृष्टिकर्ता ने विश्व सृष्टि के समय सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी इन सबको, जैसे पहले था, ठीक वैसे ही बनाया।
महाभारत व्यास जी की कृति है। तो अगर हम पहले पाठांतर को लेंगे जिसमें "सौतिरुवाच" नहीं है, तो व्यास जी इस कल्प की बात कर रहे हैं। अगर दूसरे पाठांतर को लेंगे जिसमें "सौतिरुवाच" है, तो व्यास जी इससे पूर्व के कल्प में जो हुआ उसके बारे में बता रहे हैं।
एक और बात, महाभारत के अंदर ही व्यास जी जो भविष्य में होने वाला है उसके बारे में कैसे बताते हैं? जैसे उग्रश्रवा ने ऋषियों को महाभारत सुनाया। रचना के समय में ही ऐसे कैसे लिख सकते हैं? क्योंकि महाभारत व्यास जी की समाधि की अवस्था से उत्पन्न हुआ है। समाधि में भविष्य का भी ज्ञान मिलता है।
इसलिए व्यास जी बता रहे हैं कि मैं जो महाभारत अब लिख रहा हूँ, इसे उग्रश्रवा भविष्य में नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों को सुनाएगा। तो हर कल्प में वही होता रहता है। एक कल्प की अवधि है 4.32 अरब साल। एक ही कहानी।
आज आप किसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो पहले भी कई बार आप कर चुके हैं। कई बार उसका समाधान भी आपको मिल चुका है। ऐसी कोई समस्या नहीं है जो खत्म नहीं होती। जैसे पहले हुआ था, ठीक उसी प्रकार अभी भी यह वर्तमान समस्या सुलझ जाएगी। क्योंकि कई बार आप इसी समस्या से बाहर आ चुके हैं। कहानी नहीं बदलेगी, कोई बदल भी नहीं सकता।
आज आपका मन उद्वेग में है तो पहले भी आप असंख्य बार इसी प्रकार रह चुके हैं। एक कल्प ब्रह्मा का एक दिन है। ब्रह्मा जी की अभी की उम्र है 50 साल। तो कम से कम आप 18,000 बार इसी समस्या का सामना कर चुके हैं।
इनसे पहले कई ब्रह्मा आकर जा चुके हैं। हर ब्रह्मा की आयु में आपने इसी समस्या का सामना 36,000 बार कर चुके हैं और बाहर आ भी चुके हैं। अगणित है यह। सोचिए, आप कुछ नहीं कर सकते। जैसे समस्या आई, समय आने पर उसका समाधान भी आ जाएगा। पिक्चर बन चुकी है। आप कहानी नहीं बदल सकते। न आगे-पीछे कर सकते, न समस्या को टाल सकते हैं, न उसके समाधान को।
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