संत वाणी - १८

संत वाणी - १८

  • लोग संसार के लिए रोते हैं — बच्चों के लिए, रुपयों के लिए, सपनों के लिए। पर जिसने तुम्हें जन्म दिया, उस परमात्मा के लिए कभी एक बूँद आँसू बहाई है? एक बार सच्चे दिल से उसके लिए रो लो — वही आ जाएगा, तुम्हें पा लेगा।
  • ईश्वर को पाने का एकमात्र उपाय है — अडिग विश्वास। जिसके भीतर यह विश्वास जाग गया, समझो उसका काम बन गया।
  • दूसरों को उपदेश देने की चिंता छोड़ो — पहले खुद के उद्धार की फिक्र करो।  जिससे तुम्हें ज्ञान और भक्ति मिले, जिससे मन ईश्वर के चरणों में टिके — बस वही उपाय अपनाओ।
  • विश्वास उबारता है — जैसे नौका पार लगाती है। और अहंकार? वह डुबो देता है, चाहे जल कितना ही शांत क्यों न हो।
  • तुम पहले संसार सँवारते हो, फिर भगवान को पाना चाहते हो — यही उल्टा मार्ग है।  कभी यह सोचा है? पहले भगवान को पकड़ लो, फिर संसार अपने आप सँवर जाएगा। जिससे सच्चा सुख मिले, उस राह पर क्यों नहीं चलते? अगर उल्टा चलोगे, तो दुख ही दुख पाओगे।
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