संत वाणी - १९

संत वाणी - १९

  • देह को कितना भी सुख या दुःख क्यों न हो, सच्चे भक्त उसकी परवाह नहीं करते। उनका मन तो प्रभु के चरणों में पूरी तरह लीन रहता है, बिना किसी और विचार के।
  • जब मनुष्य को ईश्वर का सच्चा प्रेम मिल जाता है, तब वह सारी बाहरी चीजों को भुला देता है। उसे संसार की कोई फिकर नहीं रहती — यहाँ तक कि अपना सबसे प्यारा शरीर भी उसे याद नहीं रहता। जब मन ऐसी दशा में पहुँच जाए, तभी समझो कि ईश्वर-प्रेम मिल गया है।
  • चाहे हजारों ग्रंथ पढ़ लो, हजारों श्लोक बोल लो, लेकिन जब तक दिल से व्याकुल होकर उसमें डूब नहीं जाओगे, तब तक उसका असली अनुभव नहीं मिलेगा।
  • जैसे-जैसे तुम पूर्व दिशा की ओर बढ़ते जाओगे, पश्चिम उतनी ही दूर होता जाएगा। ठीक वैसे ही, धर्म के मार्ग पर जितना आगे बढ़ोगे, संसार और उसकी माया उतनी ही पीछे छूटती चली जाएगी।
  • इस कलियुग में अगर कोई सच्चा सहारा है, तो वो केवल राम-नाम ही है — इसके अलावा और कुछ टिकने वाला नहीं।
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संत वाणी

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