संत वाणी - १६

संत वाणी - १६

  • ईश्वर चाहे कितने भी महान क्यों न हों, अगर कोई भक्त सच्चे प्रेम से कुछ भी छोटा-सा अर्पण करे, तो वे उसे खुशी-खुशी स्वीकार कर लेते हैं।
  • अपने सारे कर्मों का फल भगवान को समर्पित कर दो, और अपने लिए किसी भी फल की इच्छा मत रखो।
  • जब तक अहंकार की परत चढ़ी रहती है, तब तक ईश्वर दिखाई नहीं देते। जैसे ही यह अहं-बुद्धि हटती है, वैसे ही हर अंधकार मिट जाता है।
  • जिसका जैसा मन होता है, उसे वैसा ही परिणाम मिलता है। भावना ही फल की दिशा तय करती है।
  • जैसे एक सफेद कपड़े पर हल्का-सा स्याही का दाग भी साफ नज़र आता है, वैसे ही एक पवित्र व्यक्ति में अगर कोई छोटी-सी कमी भी हो, तो वह ज्यादा बड़ी दिखाई देती है।
  • जब तुम भगवान की शरण में हो, तो फिर 'यह क्यों नहीं हुआ', 'वो क्यों नहीं मिला' जैसी चिंताओं में मत उलझो।
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संत वाणी

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