संत वाणी - १५

संत वाणी - १५

  • सभी मनुष्य किसी न किसी जन्म में भगवान को अवश्य देखेंगे।
  • संसार में जो जितना सह सकता है, उतना ही वह महात्मा होता है।
  • जो ईश्वर पर निर्भर रहते हैं, वे ईश्वर की इच्छा के अनुसार ही चलते हैं; उनकी अपनी कोई इच्छा नहीं होती।
  • जिसका मनरूपी चुंबकयंत्र भगवान के चरणकमलों की ओर रहता है, उसे न मार्ग भटकने का भय होता है और न ही डूबने का।
  • सदैव सत्य बोलना चाहिए। कलियुग में सत्य का आश्रय लेने के बाद अन्य किसी साधन की आवश्यकता नहीं रहती। सत्य ही कलियुग की सर्वोत्तम तपस्या है।
  • जल में नाव रहे तो कोई हानि नहीं, लेकिन नाव में जल आ जाए तो वह डूब सकती है। उसी प्रकार, साधक संसार में रहे तो कोई समस्या नहीं, लेकिन यदि संसार उसके भीतर आ जाए तो उसका साधन मार्ग बाधित हो जाता है।
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संत वाणी

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