संत वाणी - १४

संत वाणी - १४

  • काजल की कोठरी में चाहे जितना भी संभलकर रहो, थोड़ा-बहुत काजल तो लगेगा ही। इसी तरह, युवक और युवती चाहे जितनी सावधानी बरतें, मन में कामभाव का असर होना स्वाभाविक है।
  • जैसे स्वच्छ दर्पण में चेहरा स्पष्ट दिखाई देता है, वैसे ही मन के शुद्ध होते ही उसमें भगवान का स्वरूप प्रकट होने लगता है।
  • ईश्वर के चरण कमल को थामकर संसार के कार्य करो, तब बंधन का भय नहीं रहेगा।
  • पहले ईश्वर को पाने का प्रयास करो, उसके बाद जो चाहो वह कर सकते हो।
  • जो ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, वे उन्हीं के अनुसार चलते हैं। उनकी अपनी कोई इच्छा शेष नहीं रहती।
  • गुरु तो लाखों मिलते हैं, लेकिन सच्चा शिष्य मिलना कठिन है। उपदेश देने वाले कई होते हैं, पर उसे अपनाने वाले बहुत कम।
  • जिसके मन में ईश्वर का प्रेम जाग गया हो, उसे संसार का कोई सुख प्रिय नहीं लगता।
    जो प्रभु के प्रेम में मग्न हो गया है और जिसने अपना सब कुछ उनके चरणों में समर्पित कर दिया है, उसका पूरा दायित्व प्रभु स्वयं ले लेते हैं।
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