स वै साधूत्तमः स्मृतः

स वै साधूत्तमः स्मृतः

न प्रहृष्यति सम्माने नापमाने च कुप्यति |
न क्रुद्धः परुषं ब्रूयात् स वै साधूत्तमः स्मृतः |

 

जो अपनी सम्मान करने पर खुश न होता हो और अपनी अपमान करने से क्रोधित न होता हो और क्रोधित होते हुए भी जो किसी को असभ्य बातें न सुनाता हो वह ही साधु संत कहलाता है |

 

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