श्री यन्त्र की कहानी - भाग ४

नारद मुनि द्वारा अवतार के उद्देश्य का स्मरण कराए जाने के पश्चात, माता श्री ललिता परमेश्वरी अपनी विशाल शक्ति सेना के साथ असुर भंडासुर का विनाश करने के लिए युद्धभूमि की ओर निकल पड़ीं। इस दिव्य सेना का संगठन और उसमें सम्मिलित विभिन्न देवियों का स्वरूप अत्यंत भव्य और प्रेरणादायक है।

सेना का नेतृत्व और प्रमुख योद्धा देवियाँ
शक्ति सेना के विभिन्न विभागों का नेतृत्व महान देवियों द्वारा किया गया, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशेषताएँ और सैन्य बल था:

देवी संपत्करी: श्री ललिता देवी के अंकुश से प्रकट हुईं, ये 'रण कोलाहल' नामक विशाल हाथी पर सवार थीं। उनके पास करोड़ों हाथियों की सेना थी और वे सूर्य के समान तेजस्वी कवच धारण किए हुए थीं।

देवी अश्वारूढा: माता के पाश से उत्पन्न ये देवी 'अपराजिता' नामक अश्व पर सवार थीं। उन्होंने करोड़ों उत्कृष्ट नस्ल के घोड़ों की सेना का नेतृत्व किया।

देवी दंडनाथा (वाराही): ये सेना की सेनापति हैं, जिन्हें 'वाराही' भी कहा जाता है। वे पहले 'किरिचक्र' रथ पर और फिर 'वज्रघोष' नामक विशाल सिंह पर सवार होकर युद्ध के लिए निकलीं। उनके क्रोध को शांत करने के लिए देवताओं ने उनके 12 नामों (पंचमी, दंडनाथा, संकेता आदि) का जाप किया।

श्यामला देवी (मंत्रीणी): श्री ललिता की प्रधान मंत्री, जो संगीत और ललित कलाओं की अधिष्ठात्री भी हैं। वे 'गेयचक्र' रथ पर सवार थीं। ऋषि हयग्रीव ने उनके 16 नामों की महिमा बताई है, जिनका जाप करने से साधक को विश्व में ख्याति प्राप्त होती है।

माता श्री ललिता का दिव्य स्वरूप
ब्रह्मांड की एकमात्र साम्राज्ञी माता श्री ललिता स्वयं 'चक्रराज' रथ पर विराजमान हुईं। उनके स्वरूप का वर्णन इस प्रकार है:

आयुध (शस्त्र): उन्होंने अपने चार हाथों में पाश, अंकुश, गन्ने का धनुष और पाँच पुष्प बाण धारण किए थे।

दिव्य आभा: उनकी चमक हजारों सूर्यों के समान थी और उनके छत्र की मोतियों की चमक ने पूरी दुनिया को आलोकित कर दिया था।

25 दिव्य नाम: मरुत देवताओं ने माता की स्तुति 25 नामों (सिंहासनेशी, ललिता, महाराज्ञी आदि) से की। इन नामों का पाठ करने वाले को अष्टसिद्धि और महान यश की प्राप्ति होती है।

श्री यंत्र (श्री चक्र) की संरचना और योगिनियाँ
लेख के अंत में श्री यंत्र की जटिल संरचना और उसमें निवास करने वाली विभिन्न योगिनियों के स्तरों का विवरण दिया गया है। यह संरचना बाहरी परत से केंद्र की ओर इस प्रकार है:

प्रकट शक्तियाँ (9वां स्तर): इसमें 10 सिद्धि देवियाँ, 8 मातृकाएँ और 10 मुद्रा शक्तियाँ (कुल 28) सम्मिलित हैं।

गुप्त शक्तियाँ (8वां स्तर): ये 16 शक्तियाँ चंद्रमा की 16 कलाओं के अनुरूप हैं।

गुप्ततर योगिनियाँ (7वां स्तर): 8 अनंग शक्तियाँ (अनंग कुसुमा आदि) जो कामदेव की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

संप्रदाय शक्तियाँ (6ठा स्तर): 15 शक्तियाँ जो साधक को विभिन्न सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।

कुलोत्तीर्णा शक्तियाँ (5वां स्तर): 10 शक्तियाँ जो सर्व-सिद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाली हैं।

निगर्भ योगिनियाँ (4था स्तर): 10 शक्तियाँ जो ज्ञान और रक्षा का स्वरूप हैं।

रहस्य योगिनियाँ (3रा स्तर): 8 शक्तियाँ जो अस्त्र-शस्त्र और शास्त्रों के ज्ञान से युक्त हैं।

अतिरहस्य योगिनियाँ (2रा स्तर): श्री देवी की अत्यंत निकटवर्ती 3 शक्तियाँ (कामेशी, वज्रेशी, भगमालिनी)।

तिथि देवियाँ (केंद्र): श्री ललिता के साथ उनके 15 तिथि स्वरूपों वाली देवियाँ केंद्र में विराजमान हैं।

माता श्री ललिता इन समस्त शक्तियों और योगिनियों द्वारा सेवित होने के कारण 'योगिनी गणसेविता' कहलाती हैं। इसी भव्य सैन्य बल के साथ वे भंडासुर के वध के लिए प्रस्थान करती हैं।

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श्रीयंत्र की कहानी

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