बुभुक्षिता नैव तृणं चरन्ति

बुभुक्षिता नैव तृणं चरन्ति

वनेऽपि सिंहा मृगमांसभक्षिणो बुभुक्षिता नैव तृणं चरन्ति |
एवं कुलीना व्यसनाभिभूता न नीचकर्माणि समाचरन्ति ||

 

वन में अन्य मृगों के मांस को खाने वाले सिंह भूंख लगने पर भी कभी घास नहीं खाते | ऐसे ही अच्छे कुल में पैदा हुए लोग नशे से धुत के समय पर भी कभी नीच करम का आचरण नहीं करते |

 

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