घर में पूजा कैसे करें

ghar ka mandir

पूजा के लिए शरीर, कपडे और पूजा द्रव्य शुद्ध होना चाहिए।

मूर्ति या चित्र पर पूजा कर सकते हैं।

 

पूजा में उपयोगी सामग्री

शुद्ध जल, जलपात्र चमच के साथ, पानी  छोडने के लिए दूसरा पात्र, घंटा, धूपदानी, फूलदान, तेल का दीपक, घी का दीपक, शङ्ख, धूप / अगरबत्ती, चन्दन, कुंकुम, कपूर, फूल, फल, नैवेद्य, तांबूल, आरती की थाली, अक्षत, सिक्के

देव की पूजा

१. आचमन - इन तीन मन्त्रों से पृथक्-पृथक् हाथ में जल लेकर मन्त्र पढ़ते हुए आचमन करें - 

ॐ केशवाय नमः 

ॐ नारायणाय नमः

ॐ माधवाय नमः 

इसके बाद ॐ हृषीकेशाय नमः  बोलकर हाथ धो लें।

 

२.शरीरशुद्धि -  इस मन्त्र से शरीर पर जल छिडकें -

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । 

यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

 

३. मंगल पाठ - यह मंत्र बोलें।

मङ्गलं भगवान विष्णुः मङ्गलं गरुणध्वजः। 

मङ्गलं पुण्डर काक्षः, मङ्गलायतनो हरिः॥ 

 

४. गणेश स्मरण - - ये दो मंत्र बोलकर गणेश जी का स्मरण करें -

वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ 

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

 

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । 

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ 

 

५.सङ्कल्प - हाथ में फूल और अक्षत लेकर बोलें आदि लेकर बोलें - 

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्य अहं श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं च *** देवस्य पूजां करिष्ये ।

(*** के स्थान पर आप जिस देव की पूजा कर रहे हैं उनका नाम लें जैसे - विष्णु देवस्य, हनुमान देवस्य। आगे जहां भी *** दिखें यही करें)

फूल और अक्षत थोडा जल के साथ सामने किसी पात्र में छोडकर हाथ धो लें।

 

५.ध्यान - सामने जो मूर्ति या फोटो है, उसे अच्छे से देखकर प्रणाम करें - 

*** देवाय नमः

६.आवाहन – हाथ में फूल और अक्षत लेकर देवता का आवाहन करें -

*** देवाय नमः, आवाहयामि। 

फूल और अक्षत मूर्ति या फोटो पर चढाएं।

 

७.आसन - फूल और अक्षत हाथ में लेकर बोलें -

*** देवाय नमः आसनं समर्पयामि  

 

८.पाद्य -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

*** देवाय नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि 

 

९.अर्घ्य -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

*** देवाय नमः हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि

 

१०.आचमन -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

*** देवाय नमः आचमनीयं समर्पयामि 

 

१२.स्नान -  फूल से पानी मूर्ति या फोटो पर छिडकें - 

*** देवाय  नमः स्नानं समर्पयामि

 

१३.वस्त्र - अक्षत चढायें - 

*** देवाय नमः वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि

 

१४.यज्ञोपवीत  - अक्षत चढायें -

*** देवाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि

 

१३.चन्दन -  टीका लगायें -

*** देवाय नमः चन्दनं समर्पयामि

 

१४.पुष्प - फूल और हार चढायें - 

*** देवायनमः पुष्पाणि समर्पयामि पुष्पमालां समर्पयामिः

इसके बाद अष्टोत्तर शतनामावलि इत्यादि इष्ट मंत्रों द्वारा फूल चढा सकते हैं।

 

१५. धूप -  घंटा बजाकर धूप या अगरबत्ती दिखायें - 

*** देवाय नमः धूपं आघ्रापयामि

 

१६.दीप - घंटा बजाकर दीप दिखायें - 

*** देवाय नमः दीपं दर्शयामि

 

१७. नैवेद्य - घंटा बजाकर भोग चढायें - 

*** देवाय नमःनैवेद्यं निवेदयामि

 

१८. फल -  फल समर्पण कीजिए - 

*** देवाय नमः फलं समर्पयामिः

 

१९.ताम्बूल - पान चढाइये

*** देवाय नमः ताम्बूलं समर्पयामिः

 

२०.दक्षिणा  -  सिक्का समर्पण कीजिए 

*** देवाय नमः दक्षिणां समर्पयामिः

 

२१. आरती करें

 

२२.मंत्रपुष्पांजलि -  अञ्जलि में (दोनों हाथों में) फूल भरकर चढाइये

*** देवाय नमः मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामिताम्बूलं

 

२३.प्रदक्षिणा 

*** देवाय नमः प्रदक्षिणां समर्पयामि

 

२४.नमस्कार  

*** देवाय नमः नमस्कारान् समर्पयामिः

 

२४.क्षमा याचना - यह मंत्र बोलें।

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। 

यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ 

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। 

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर ॥ 

अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम । 

तस्मात् कारुण्यभावेन रक्ष मां परमेश्वर ॥

 

२५. समर्पण - यह मंत्र बोलकर पात्र में चमच से पानी छोडें

ॐ तत् सत् ब्रह्मार्पणमस्तु।



देवी की पूजा

१. आचमन - इन तीन मन्त्रों से पृथक्-पृथक् हाथ में जल लेकर मन्त्र पढ़ते हुए आचमन करें - 

ॐ केशवाय नमः 

ॐ नारायणाय नमः

ॐ माधवाय नमः 

इसके बाद ॐ हृषीकेशाय नमः  बोलकर हाथ धो लें।

 

२.शरीरशुद्धि -  इस मन्त्र से शरीर पर जल छिडकें -

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । 

यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

 

३. मंगल पाठ - यह मंत्र बोलें।

मङ्गलं भगवान विष्णुः मङ्गलं गरुणध्वजः। 

मङ्गलं पुण्डर काक्षः, मङ्गलायतनो हरिः॥ 

 

४. गणेश स्मरण - - ये दो मंत्र बोलकर गणेश जी का स्मरण करें -

वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ 

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

 

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । 

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ 

 

५.सङ्कल्प - हाथ में फूल और अक्षत लेकर बोलें आदि लेकर बोलें - 

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्य अहं श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं च  *** देव्याः पूजां करिष्ये ।

(*** के स्थान पर आप जिस देवी की पूजा कर रहे हैं उनका नाम लें जैसे - लक्ष्मी देव्याः, दुर्गा देव्याः । आगे जहां भी *** दिखें यही करें)

फूल और अक्षत थोडा जल के साथ सामने किसी पात्र में छोडकर हाथ धो लें।

 

५.ध्यान - सामने जो मूर्ति या फोटो है, उसे अच्छे से देखकर प्रणाम करें - 

*** देव्यै नमः

 

६.आवाहन – हाथ में फूल और अक्षत लेकर देवता का आवाहन करें -

***देव्यै नमः, आवाहयामि। 

फूल और अक्षत मूर्ति या फोटो पर चढाएं।

 

७.आसन - फूल और अक्षत हाथ में लेकर बोलें -

***देव्यै नमः आसनं समर्पयामि  

 

८.पाद्य -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

***देव्यै नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि 

 

९.अर्घ्य -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

***देव्यै नमः हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि

 

१०.आचमन -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

***देव्यै नमः आचमनीयं समर्पयामि 

 

१२.स्नान -  फूल से पानी मूर्ति या फोटो पर छिडकें - 

***देव्यै नमः स्नानं समर्पयामि

 

१३.वस्त्र - अक्षत चढायें - 

***देव्यै नमः वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि

 

१४.मंगलसूत्र -  अक्षत चढायें

***देव्यै नमः माङ्गल्यसूत्रं समर्पयामि

 

१३.चन्दन और कुंकुम -  टीका लगायें -

***देव्यै नमः चन्दनं समर्पयामि कुंकुमं समर्पयामि

 

१४.पुष्प - फूल और हार चढायें - 

***देव्यै नमः पुष्पाणि समर्पयामि पुष्पमालां समर्पयामिः

इसके बाद अष्टोत्तर शतनामावलि इत्यादि इष्ट मंत्रों द्वारा फूल चढा सकते हैं।

 

१५. धूप - घंटा बजाकर धूप या अगरबत्ती दिखायें - 

***देव्यै नमः धूपं आघ्रापयामि

 

१६.दीप - घंटा बजाकर दीप दिखायें - 

***देव्यै नमः दीपं दर्शयामि

 

१७. नैवेद्य - घंटा बजाकर भोग चढायें - 

***देव्यै नमः नैवेद्यं निवेदयामि

 

१८. फल -  फल समर्पण कीजिए - 

***देव्यै नमः फलं समर्पयामिः

 

१९.ताम्बूल - पान चढाइये

***देव्यै नमः ताम्बूलं समर्पयामिः

 

२०.दक्षिणा  -  सिक्का समर्पण कीजिए 

***देव्यै नमः दक्षिणां समर्पयामिः

 

२१. आरती कीजिए

 

२२.मंत्रपुष्पांजलि -  अञ्जलि में (दोनों हाथों में) फूल भरकर चढाइये

***देव्यै नमः मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामिताम्बूलं

 

२३.प्रदक्षिणा 

***देव्यै नमः प्रदक्षिणां समर्पयामि

 

२४.नमस्कार  

***देव्यै नमः नमस्कारान् समर्पयामिः

 

२४.क्षमा याचना - यह मंत्र बोलें।

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि। 

यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ 

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। 

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥ 

अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम । 

तस्मात् कारुण्यभावेन रक्ष मां परमेश्वरि ॥

 

२५. समर्पण - यह मंत्र बोलकर पात्र में चमच से पानी छोडें

ॐ तत् सत् ब्रह्मार्पणमस्तु।

 

अनेक देवों और देवियों की एक साथ पूजा

घर के मंदिर में अनेक देवी देवताओंं की मूर्तियां या फोटो होने पर इस प्रकार से उनकी एक साथ में पूजा करें।

१. आचमन - इन तीन मन्त्रों से पृथक्-पृथक् हाथ में जल लेकर मन्त्र पढ़ते हुए आचमन करें - 

ॐ केशवाय नमः 

ॐ नारायणाय नमः

ॐ माधवाय नमः 

इसके बाद ॐ हृषीकेशाय नमः  बोलकर हाथ धो लें।

 

२.शरीरशुद्धि -  इस मन्त्र से शरीर पर जल छिडकें -

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । 

यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

 

३. मंगल पाठ - यह मंत्र बोलें।

मङ्गलं भगवान विष्णुः मङ्गलं गरुणध्वजः। 

मङ्गलं पुण्डर काक्षः, मङ्गलायतनो हरिः॥ 

 

४. गणेश स्मरण - - ये दो मंत्र बोलकर गणेश जी का स्मरण करें -

वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ 

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

 

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । 

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ 

 

५.सङ्कल्प - हाथ में फूल और अक्षत लेकर बोलें आदि लेकर बोलें - 

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्य अहं श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं च पूजां करिष्ये ।

फूल और अक्षत थोडा जल के साथ सामने किसी पात्र में छोडकर हाथ धो लें।

 

५.ध्यान - सामने जो मूर्ति या फोटो है, उसे अच्छे से देखकर प्रणाम करें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः

 

६.आवाहन – हाथ में फूल और अक्षत लेकर देवता का आवाहन करें -

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः आवाहयामि। 

फूल और अक्षत मूर्ति या फोटो पर चढाएं।

 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमःआसनं समर्पयामि  

 

८.पाद्य -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि 

 

९.अर्घ्य -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि

 

१०.आचमन -  चमच से जलपात्र से पानी लेकर दूसरे पात्र में डालें -

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः आचमनीयं समर्पयामि 

 

१२.स्नान -  फूल से पानी मूर्ति या फोटो पर छिडकें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः स्नानं समर्पयामि

 

१३.वस्त्र - अक्षत चढायें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि

 

१४.मंगलसूत्र -  अक्षत चढायें

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः माङ्गल्यसूत्रं समर्पयामि

 

१३.चन्दन -  टीका लगायें -

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः चन्दनं समर्पयामि

 

१४.पुष्प - फूल और हार चढायें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः पुष्पाणि समर्पयामि पुष्पमालां समर्पयामिः

इसके बाद अष्टोत्तर शतनामावलि इत्यादि इष्ट मंत्रों द्वारा फूल चढा सकते हैं।

 

१५. धूप -  धूप या अगरबत्ती दिखायें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः धूपं आघ्रापयामि

 

१६.दीप - दीप दिखायें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः दीपं दर्शयामि

 

१७. नैवेद्य - भोग चढायें - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः नैवेद्यं निवेदयामि

 

१८. फल -  फल समर्पण कीजिए - 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः फलं समर्पयामिः

 

१९.ताम्बूल - पान चढाइये

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः ताम्बूलं समर्पयामिः

 

२०.दक्षिणा  -  सिक्का समर्पण कीजिए 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः दक्षिणां समर्पयामिः

 

२१. आरती कीजिए

 

२२.मंत्रपुष्पांजलि -  अञ्जलि में (दोनों हाथों में) फूल भरकर चढाइये

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामिताम्बूलं

 

२३.प्रदक्षिणा 

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः प्रदक्षिणां समर्पयामि

 

२४.नमस्कार  

सर्वाभ्यो देवताभ्यो नमः नमस्कारान् समर्पयामिः

 

२४.क्षमा याचना - यह मंत्र बोलें।

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। 

यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ 

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। 

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर ॥ 

अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम । 

तस्मात् कारुण्यभावेन रक्ष मां परमेश्वर ॥

 

२५. समर्पण - यह मंत्र बोलकर पात्र में चमच से पानी छोडें

ॐ तत् सत् ब्रह्मार्पणमस्तु।

 

पूजा में शुद्धता क्यों आवश्यक है
शुद्धता से वातावरण और मन दोनों पवित्र रहते हैं। इससे पूजा का फल सही रूप में मिलता है।
क्या केवल वस्त्र और सामग्री शुद्ध होना काफी है
नहीं, मन और आचरण भी शुद्ध होना चाहिए तभी पूजा पूर्ण मानी जाती है।
यदि कोई कहे कि बाहरी शुद्धता दिखावा है, असली भक्ति मन की है तो क्या उत्तर है
भक्ति मुख्य है पर शारीरिक शुद्धता साधक को अनुशासन और एकाग्रता देती है, जिससे मन की भक्ति और प्रबल बनती है।


पूजा क्रम क्यों इतना विस्तृत है
यह क्रम देवता को सम्मानपूर्वक अतिथि मानकर सत्कार का प्रतीक है।
क्या छोटे रूप में भी पूजा हो सकती है
हाँ, श्रद्धा और संकल्प से कुछ चरणों में भी पूजा की जा सकती है।
जो कहे कि यह सब लंबा समय लेने वाला है और आधुनिक जीवन में असंभव है, उसे क्या कहना चाहिए
पूजा का सार भाव और समर्पण है, समय न होने पर संक्षिप्त रूप किया जा सकता है पर विधि से करने पर अनुशासन और गहराई आती है।


आवाहन और अर्पण का अर्थ क्या है
आवाहन देवता को स्मरण और आमंत्रण है, अर्पण उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण।
क्या बिना मूर्ति के आवाहन किया जा सकता है
हाँ, मन में देवता का ध्यान करके भी आवाहन संभव है।
यदि कोई कहे कि मूर्ति या चित्र में देवता कैसे आ सकते हैं, तो उत्तर क्या है
मूर्ति केवल माध्यम है, शक्ति श्रद्धा और मंत्र से आती है। श्रद्धा से मन देवता का स्वरूप प्रकट करता है।


आरती और मंत्रपुष्पांजलि का महत्व क्या है
आरती प्रकाश और आनंद का प्रतीक है, मंत्रपुष्पांजलि संपूर्ण समर्पण का।
क्या आरती के बिना पूजा अधूरी है
आरती भाव प्रकट करने का माध्यम है, बिना भी पूजा हो सकती है पर आरती से पूर्णता आती है।
जो कहे कि यह सब केवल प्रतीकात्मक है, असली पूजा तो भीतर है, क्या यह सही है
हाँ, पर प्रतीक साधक को गहराई से जोड़ते हैं, केवल भीतर के भरोसे मन जल्दी भटक सकता है।


क्षमा याचना क्यों आवश्यक है
पूजक मानता है कि उससे मंत्र, क्रिया या भक्ति में त्रुटियां हो सकती हैं।
क्या यह आत्मग्लानि नहीं है
नहीं, यह विनम्रता है जो साधना को शुद्ध करती है।
यदि कोई कहे कि भगवान सर्वज्ञ हैं, फिर क्षमा क्यों मांगना
क्षमा याचना से साधक का अहंकार टूटता है, और यही भक्ति की सच्ची नींव है।

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