क्या बटवारा करना पारिवारिक समस्याओं का समाधान हो सकता है?

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क्या बटवारा करना पारिवारिक समस्याओं का समाधान हो सकता है?

गरुड़ अमृत लाने जा रहे हैं अपनी सौतेली मां और सौतेले भाइयों के लिए। तभी उनकी गुलामी से गरुड़ और गरुड़ की मां विनता मुक्त हो पाएंगे। रास्ते में भूख लगने पर गरुड़ ने बहुत सारे क्रूर निशादों को खा लिया था। जैसे मां ने कहा था। अपने पिताजी कश्यप से भी मिलन हुआ गरुड़ का। कश्यप ने मां और भाई अरुण की खुशहाली के बारे में पता किया और गरुड़ से पूछा कि तुम्हें पर्याप्त भोजन मिल रहा है कि नहीं? गरुड़ ने कहा, भूख नहीं मिटती। अभी-अभी हजारों निषादों को खाकर आया हूं, फिर भी भूख नहीं मिटी है। कश्यप ने सोचा, देवों से अमर्द छीनना कोई आसान काम नहीं है। लड़ाई होगी देवों के साथ, शरीर में ताकत चाहिए। कश्यप जी ने कहा, वो तालाब देख रहे हो? उसमें एक हाथी और एक कछुआ है। दोनों ही बहुत बड़े हैं। हाथी ६ योजन ऊंचा है, १२ योजन लंबा है। कछुए का व्यास है १० योजन और ऊंचाई ३ योजन। एक योजन है ८ मील। तब इसे खाने वाले गरुड़ का आकार कितना बड़ा होगा? कश्यप जी गरुड़ को बताते हैं, ये दोनों ये हाथी और कछुआ दोनों भाई हुआ करते थे, दोनों तापस थे। बड़ा भाई विभा वसु, छोटा भाई सुप्रतीक। दोनों की जमीन जायदाद को बड़ा भाई ही संभालता था, बटवारा नहीं हुआ था। सुप्रतीक ने चाहा कि बटवारा हो जाए, मैं अलग हो जाऊं। वह मांगता रहा, बड़ा भाई टालता रहा। एक बार विभावसु ने कहा, देखो बटवारा करना कभी कोई समाधान नहीं बनता। बटवारे के बाद भाइयों के बीच लड़ाई शुरू हो जाती है। कि अच्छा सब कुछ तुमने ले लिया, तुमने रख लिया। दोनों ही लोभी हो जाएंगे और दुश्मन लोग बीच में हितैषी बनकर घुसेंगे और दोनों के मन को और दूषित करेंगे। आग में तेल डालकर मजा देखेंगे। बड़ा भाई अपने से छोटे को पुत्र के समान माने, छोटा भाई बड़े भाई को अपने पिता जैसे सम्मान दे। यही हमारा संस्कार है। लगता है तुम्हें इतना कहने के बाद भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। तुम तमोगुण से भर गए हो, जाकर एक हाथी बनकर जन्म लो। सुप्रतीक ने भी श्राप दे दिया, तुम भी कछुआ बनकर जन्म लो। तप शक्ति थी दोनों में। बन गए हाथी और कछुआ। उसके बाद दोनों ने आपस में लड़ना शुरू किया, भयंकर लड़ाई। हाथी तालाब के पास आएगा, कछुआ पानी के ऊपर आएगा, हाथी तालाब में कूदेगा, दोनों में भयंकर लड़ाई। एक दूसरे को मारना चाहते थे। कश्यप जी ने गरुड़ से कहा, दोनों को खा जाओ, उसके बाद अमृत लेने निकलना। गरुड़ तालाब के पास गए तो उन्हें दिखाई दिए हाथी और कछुआ। गरुड़ ने एक पंजे से हाथी को छपट लिया और दूसरे से कछुए को और आकाश से उड़कर आलम्ब तीर्थ पहुंचा। वहां एक वटवृक्ष ने गरुड़ से कहा, आप मेरी उस शाखा पर बैठकर आराम से भोजन कीजिए। वो शाखा १०० योजन लंबी थी। जैसे गरुड़ उस पर बैठे, वो शाखा टूट गई। पर गरुड़ ने तुरंत उसे अपने चोंच से पकड़ लिया। नीचे गिरने से बचाया, इसका कारण आगे देखेंगे।

 

  • गरुड़ की अमृत प्राप्ति की यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    गरुड़ की यात्रा का उद्देश्य अपनी माता विनता और स्वयं को अपनी सौतेली माता कद्रू तथा सर्प भाइयों की दासता से मुक्त करना था। यह मातृभक्ति और न्याय की स्थापना का प्रतीक है।
  • कश्यप ऋषि ने गरुड़ को हाथी और कछुए का भक्षण करने का परामर्श क्यों दिया?
    देवों से अमृत छीनने के लिए अपार शक्ति और ऊर्जा की आवश्यकता थी। कश्यप जी जानते थे कि मार्ग में होने वाले महायुद्ध के लिए गरुड़ का तृप्त होना अनिवार्य है, इसलिए उन्होंने उन विशालकाय जीवों के रूप में संचित मांस को ग्रहण करने का सुझाव दिया।
  • विभावसु और सुप्रतीक के पूर्व जन्म का वृत्तांत क्या शिक्षा देता है?
    यह वृत्तांत सिखाता है कि भाइयों के बीच संपत्ति का विवाद और लोभ तपस्वियों की बुद्धि को भी नष्ट कर देता है। विभाजन की जिद्द और परस्पर द्वेष व्यक्ति को अधोगति की ओर ले जाता है, जिससे मनुष्य पशु तुल्य योनियों में गिर जाता है।
  • विभावसु के अनुसार पारिवारिक सुख का मूल मंत्र क्या है?
    विभावसु के अनुसार, बड़ा भाई छोटे को पुत्रवत स्नेह दे और छोटा भाई बड़े को पिता समान सम्मान प्रदान करे। जब तक परिवार में एकता रहती है, बाहरी शत्रु कलह का लाभ नहीं उठा पाते।
  • हाथी और कछुए के आकार का विवरण क्या संकेत देता है?
    हाथी का 6 योजन ऊंचा और कछुए का 10 योजन विस्तृत होना उनकी शारीरिक विशालता और तामसी अहंकार को दर्शाता है। इतने विशाल जीवों को एक साथ उठा लेना गरुड़ की असीमित दैवीय शक्ति का परिचायक है।
  • गरुड़ द्वारा हजारों निषादों को खाने के बाद भी भूख शांत न होना किस ओर इंगित करता है?
    यह इस तथ्य को दर्शाता है कि महान कार्यों के लिए साधारण आहार पर्याप्त नहीं होता। निषाद क्रूरता के प्रतीक थे, जिन्हें खाकर गरुड़ ने पृथ्वी का भार तो कम किया, परंतु अमृत जैसे दिव्य लक्ष्य हेतु उन्हें अधिक विशिष्ट बल की आवश्यकता थी।
  • विभावसु और सुप्रतीक ने एक दूसरे को श्राप क्यों दिया?
    तप शक्ति होने के उपरांत भी वे क्रोध और अहंकार को नहीं जीत पाए। जब छोटे भाई ने केवल संपत्ति चाही और बड़े भाई ने उसे समझाने के स्थान पर दंड देना उचित समझा, तो उनकी तपस्या श्राप में परिवर्तित हो गई।
  • वटवृक्ष की शाखा टूटने पर गरुड़ ने उसे चोंच से क्यों पकड़ लिया?
    गरुड़ ने देखा कि उस शाखा पर बालखिल्य ऋषि तपस्या कर रहे थे। यदि शाखा भूमि पर गिरती, तो ऋषियों की मृत्यु हो जाती। यह गरुड़ की अहिंसा, संवेदनशीलता और सामर्थ्य का अद्भुत उदाहरण है कि उन्होंने हाथी-कछुए को पंजों में दबाए रखते हुए चोंच से विशाल शाखा को संभाल लिया।
  • आलम्ब तीर्थ का इस कथा में क्या महत्व है?
    आलम्ब तीर्थ वह स्थान बना जहां गरुड़ की शक्ति और उनके धर्मपरायण स्वभाव की परीक्षा हुई। यह स्थान इस महान घटना का साक्षी है जहां एक पक्षी ने पर्यावरण (वृक्ष) और ऋषियों की रक्षा को अपने भोजन से अधिक प्राथमिकता दी।
  • इस कथा का वह गुप्त पक्ष क्या है जो साधारणतः ओझल रहता है?
    इसका गुप्त पक्ष यह है कि गरुड़ केवल एक शक्तिशाली पक्षी नहीं, बल्कि धर्म के रक्षक हैं। वे चाहते तो शाखा को गिरने देते, परंतु उन्होंने अपने शरीर का संतुलन बिगाड़कर भी सूक्ष्म जीवों और ऋषियों की रक्षा की। यह दर्शाता है कि वास्तविक बल वही है जो दुर्बलों की रक्षा में प्रयुक्त हो।
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