कुरुक्षेत्र में युद्ध शुरू होनेवाला है

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र: महाभारत के युद्ध का शंखनाद

कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर जब पांडव और कौरवों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी थीं, तो वह क्षण केवल एक युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच के महासंग्राम का आरंभ था। भगवद गीता के प्रथम अध्याय के इन श्लोकों में उस ऐतिहासिक क्षण का सजीव वर्णन मिलता है, जब युद्ध का उद्घोष हुआ।

भीष्म पितामह का सिंहनाद

युद्ध की सुगबुगाहट के बीच, जब दुर्योधन अपनी सेना का आकलन कर रहा था, तो पितामह भीष्म ने उसके मन के डर को भांप लिया। दुर्योधन को उत्साहित करने और कौरव सेना में जोश भरने के लिए, अत्यंत प्रतापी भीष्म ने सिंह की दहाड़ के समान गरजते हुए अपना शंख बजाया।

चहुंओर गूंजता शंखनाद

भीष्म के शंख बजाते ही कौरव पक्ष के अन्य योद्धाओं ने भी अपने-अपने शंख, नगाड़े, ढोल और नरसिंगे बजाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते कुरुक्षेत्र का मैदान वाद्य यंत्रों की उस भयानक और तुमुल ध्वनि से गूंज उठा।

पांडवों का दिव्य प्रत्युत्तर

कौरवों की चुनौती का उत्तर देने के लिए, सफेद घोड़ों से जुते हुए अपने विशाल रथ पर सवार भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ने भी अपने दिव्य शंख बजाए।

  • श्रीकृष्ण ने अपना 'पाञ्चजन्य' शंख बजाया।

  • अर्जुन ने 'देवदत्त' नामक शंख का घोष किया।

  • भीमसेन ने अपना 'पौण्ड्र' नामक महाशंख बजाया।

  • युधिष्ठिर ने 'अनंतविजय' शंख बजाया।

  • नकुल और सहदेव ने क्रमशः 'सुघोष' और 'मणिपुष्पक' शंखों का वादन किया।

इस दिव्य शंखनाद ने न केवल धरती बल्कि आकाश को भी कपां दिया और धृतराष्ट्र के पुत्रों (कौरवों) के हृदयों को विदीर्ण कर दिया।

अर्जुन की जिज्ञासा और कृष्ण का सारथ्य

जब युद्ध की स्थितियां सुव्यवस्थित हो गईं और शस्त्र चलने ही वाले थे, तब धनुष उठाए हुए अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से एक विशेष आग्रह किया। अर्जुन ने कहा:

"हे अच्युत! कृपया मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले जाकर खड़ा करें, ताकि मैं देख सकूं कि इस युद्ध की अभिलाषा रखने वाले कौन-कौन से योद्धा यहाँ एकत्रित हुए हैं और मुझे किनके साथ युद्ध करना है।"

अर्जुन उन लोगों को देखना चाहता था जो दुष्ट बुद्धि वाले दुर्योधन का साथ देने और उसका प्रिय करने के लिए इस रणभूमि में आए थे।

हिन्दी

हिन्दी

भगवद्गीता

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies