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कर्म मार्ग, ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग तीनों में श्रवण का मुख्यत्व है। कर्मकांड का स्रोत है वेद। सारे यज्ञों के बारे में वेदों में ही बताया गया है। अन्य पद्धतियां भी पूजन की पद्धतियां भी वैदिक तत्वों पर ही आधारित हैं। वेद हमेशा मौखिक रूप से ही सिखाया जाता है। गुरु मंत्र बोलते हैं, उसको सुनकर शिष्य भी बोलने लगता है। कभी पुस्तक से नहीं। परंपरागत वैदिक गुरुकुलों में आज भी पुस्तक नहीं होते। शिक्षण मौखिक रूप से ही होता है। ज्ञान मार्ग में भी कहा गया है, श्रोतव्यो मंतव्यो निधिध्यासितव्यः। उपनिषद भी पहले सुनो, फिर उसका मनन करो, फिर बार-बार उसका स्मरण करो। सबसे पहले श्रवण ही यहां पर भी। श्रवण ही पहला कदम है। पठन नहीं श्रवण। आपको ये पता है श्रवण ज्यादा प्रभावशाली है। किसी गीत को सुनने में और उसके लिरिक्स को पढ़ने में भेद है कि नहीं? दोनों समान नहीं है। जब कोई कुछ बोलता है तो उसका भाव भी उसके साथ जुड़ जाता है। यह लेख में नहीं होता। वक्ता श्रोता में उत्तेजना ला सकता है, उत्साह ला सकता है। दिलचस्पी ला सकता है। वक्ता श्रोता को प्रेरणा दे सकता है। पहला सूत रोमहर्षण जी को वो नाम मिला क्योंकि उनकी कथा सुनकर श्रोताओं को रोमांच हुआ करता था। भक्ति मार्ग में भी भगवान कहते हैं, मत् गुण श्रुति मात्रेण मयी सर्व गुहाशये मनोगदिर अविच्छिन्ना यथा गंगाम्भ सोम्बुधौ। भगवान की कीर्ति के बारे में सुनते ही मन उनकी ओर जैसे समुद्र की ओर गंगा का प्रवाह। यह स्वाभाविक है। यहां पर भी भगवान ने श्रुति कहा है, श्रवण, पठन नहीं। पढ़ने की अनुभूति और सुनने की अनुभूति दोनों में बहुत अंतर है। भगवान को अपने हृदय कमल में लाने के लिए सबसे सुलभ, सबसे आसान मार्ग है उनकी महिमा का श्रवण। नारद भक्ति सूत्र में भी यही कहा है। लोगेपि गुण श्रवण कीर्तनात। उनकी महिमा के बारे में दूसरों से सुनो। दूसरों को सुनाओ। कथा श्रवण के लिए सबका अधिकार है, यहां तक कि सन्यासियों को भी। सन्यासी जनों द्वारा सब कुछ त्याग किया हुआ रहता है, तब भी वे कथा सुन सकते हैं। मुक्ता अपि लीलया विग्रहं कृत्वा भजन्ते। जीवन मुक्त भी भगवत लीलाओं की सेवन करते हैं। जीवन मुक्त भी भगवत लीलाओं की कथा सुनते हैं। हर दिन थोड़ी सी कथा सुनिए, बड़ा परिवर्तन आएगा जीवन में। आजकल तो कई सुविधाएं हैं आपके पास, चलकर कहीं जाने की जरूरत नहीं है। कथा पंडाल ढूंढकर जाना जरूरी नहीं है आजकल। सब कुछ आपके मोबाइल पर ही उपलब्ध है। आपको ढूंढते आ जाता है। यह भगवान की कृपा है। इसका लाभ उठाइए। प्रतिदिन थोड़ी सी कथा सुनिए। बड़ा परिवर्तन आएगा, समस्याओं का समाधान अपने आप आने लगेगा। सुख और शांति मिलेगी।
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