ज्येष्ठत्वं जन्मना नैव

ज्येष्ठत्वं जन्मना नैव

ज्येष्ठत्वं जन्मना नैव गुणैर्ज्येष्ठत्वमुच्यते ।
गुणाद् गुरुत्वमायान्ति दुग्धं दधि घृतं क्रमात् ।।

जो पहले जनम लेता है वह ज्येष्ठ नहीं होता बल्कि जो मनुष्य गुणवान है वह ज्येष्ठ होता है। जिस प्रकार से दूध, दही और घी एक के बाद एक आनेवाले होकर भी अपने पहले के रूप से ज्यादा पुष्टिदायी होता है।

हिन्दी

हिन्दी

सुभाषित

Click on any topic to open

0

Copyright © 2026 | Vedadhara | All Rights Reserved. | Designed & Developed by Claps and Whistles
| | | | |
Vedahdara - Personalize

We use cookies