गणेश जी के २६ मंत्र

गणेश मंत्र

गणेश अष्टाक्षर मंत्र - सफलता के लिए

ॐ गं गणपतये नमः

 

महागणपति मंत्र - लोगों को अनुकूल करने के लिए

ॐ श्रीँ ह्रीँ  क्लीँ ग्लौँ गँ गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ।

 

दशभुज गणपति मंत्र - अपमृत्यु और ग्रहपीडा से बचने के लिए

ॐ नमो गण्पतये महावीर दशभुज महाकालविनाशन मृत्युं हन हन धम धम मथ मथ कालं संहर संहर सर्वग्रहान् चूर्णय चूर्णय नागान् मोटय मोटय रुद्ररूप त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट् स्वाहा ।

 

गणेश बीज मंत्र - विघ्न निवारण के लिए

१ - ॐ गँ ।

२ - गँ ।

३ - गः ।

 

क्षिप्र प्रसादन गणेश मंत्र - तुरंत कार्य सिद्धि के लिए

१ - गँ क्षिप्रप्रसादनाय नमः ।

२ - गँ क्षिप्रप्रसादनाय स्वाहा ।

 

अर्क गणपति मंत्र - लोगों को अनुकूल करने के लिए

ॐ गँ गणपते अर्कगणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ।

 

वक्रतुण्ड मंत्र - विपत्तियों को रोकने के लिए

वक्रतुण्डाय हुँ ।

 

गणपति त्र्यक्षरी मंत्र - ऐश्वर्य के लिए

१ - ॐ ह्रीँ श्रीँ ह्रीँ ।

२ - ॐ ह्रीँ ग्रीँ ह्रीँ ।

 

कुक्षिगणपति मंत्र - दूसरों के दुर्व्यवहार को रोकने के लिए

ॐ हुँ ग्लौं ठ ठ राज सर्वजन गति मति मुख क्रोध जिह्वां स्तंभय स्तंभय स्वाहा ।

 

वीरगणपति मंत्र - समस्त लोक को अनुकूल करने के लिए

ॐ ह्रीँ हरि हरि गणपतये वरद वरद सर्वलोकं मे वशमानय स्वाहा ।

 

हरिद्रागणपति मंत्र - घर, भूमि प्राप्ति के लिए

ॐ हुँ गँ ग्लौँ हरिद्रागणपतये वर वरद सर्वजनहृदयं स्तंभय स्तंभय स्वाहा ।

 

गणेश लक्ष्मी मंत्र - धन संपत्ति के लिए

ॐ श्रीँ ह्रीँ क्लीँ ग्लौँ ॐ नमो भगवति महालक्ष्मि वर वरदे श्रीँ विभूतये स्वाहा ।

 

हेरंब गणपति मंत्र - बाधाओं को दूर करने के लिए

१ - ॐ गँ नमः ।

२ - ॐ गूँ नमः ।

 

गणेश मालामंत्र - रक्षा के लिए

१ - ॐ नमो भगवते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं हन हन कालं संहर संहर धम धम मथ मथ त्र्यैलोक्यं मोहय मोहय ब्रह्मविष्णुरुद्रान् मोहय मोहय अचिन्त्य बलपराक्रम सर्वव्याधीन् विनाशय विनाशय सर्वग्रहान् चूर्णय चूर्णय नागान् मोटय मोटय त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुँ फट् स्वाहा ।

 

२ - ॐ ह्रीँ क्रोँ गूँ नमः सर्वविघ्नाधिपाय सर्वार्थसिद्धिदाय सर्वदुःखप्रशमनाय एह्येहि भगवन् सर्वा आपदः स्तम्भय स्तम्भय ह्रीँ गूँ गाँ नमः स्वाहा क्रों ह्रीँ ।

 

शक्ति गणपति मंत्र - भय निवारण के लिए

१ - श्रीँ गणपतये नमः ।

२ - ॐ ह्रीँ गं ह्रीँ वशमानय स्वाहा ।

३ - ह्रीँ गँ ह्रीँ महागणपतये स्वाहा ।

 

विरिगणपति मंत्र - लोगों को अनुकूल करने के लिए

१ - ॐ ह्रीं सं विरिविरिगणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ।

२ - ह्रीं विरिविरिगणपति वर वरद सर्वलोकं मे वशमानय स्वाहा ।

 

लक्ष्मीगणपति मंत्र - सन्तान के लिए

ॐ नमो लक्ष्मीगणेशाय मह्यं पुत्रं प्रयच्छ स्वाहा ।


क्या इस मंत्र को सुनने के लिए दीक्षा आवश्यक है?

नहीं। दीक्षा केवल तब आवश्यक होती है जब आप मंत्र साधना करना चाहते हैं, सुनने के लिए नहीं।

लाभ प्राप्त करने के लिए बस हमारे द्वारा दिए गए मंत्रों को सुनना पर्याप्त है।

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